‘कहानी में होना चाहिए कहानीपन’

-नारायणी साहित्य अकादमी की गोष्ठी में कहानी के सामाजिक सरोकार पर हुई चर्चा

रायपुर।

नारायणी साहित्य अकादमी के तत्वावधान में प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. मृणालिका ओझा के कुशालपुर स्थित निवास पर कहानी के सामाजिक सरोकार विषय पर कहानी पाठ के साथ ही साथ विस्तार से चर्चा भी की गई।

डॉ. रामकुमार बेहार ने मैं व्यवसायी हूँ नामक लघुकथा का पाठ किया। इस कहानी में निम्न वर्ग के कर्मचारी को दोयम दर्जे का ही मानने एवं उच्च वर्ग द्वारा स्वयं के ही स्वार्थ को सर्वोपरि मानने की बात प्रभावी ढंग से कही गई है। जयश्री ओझा की कहानी अतीत के गर्त नारी विमर्श पर केन्द्रित कहानी है। गोपाल सोलंकी ने अपनी कहानी सुपर बेबी ें भ्रूण हत्या के दुष्परिणामों के प्रति जागृत किया है।

कहानियों पर चर्चा करते हुए संस्था की प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. मृणालिका ओझा ने कहा कि विभिन्न विषयों पर केन्द्रित ये कहानियां तथ्य परक एवं आसपास के परिदृश्य को उद्घाटित करती है।

डॉ. सुधीर शर्मा ने कहा कि लोग गद्य की ओर आ रहे हैं, यह सकारात्मक पहल है। वीरेन्द्र तिवारी ने कहा कि कहानियों में भावनात्मक पक्ष प्रबलता से सामने आया है। रंजन मोडक ने कहा कि कहानियों में संवाद के न होने से वह एक वर्णन मात्र हो जाती है। अख्तर अली ने कहा कि कहानी में सामाजिक सरोकार की दृष्टि से पात्रों के मध्य ऐसी बातचीत होनी चाहिए जो भविष्य में समाज के लिए दर्पण की तरह हो।

इसके अतिरिक्त आचार्य अमरनाथ त्यागी, लतिका भावे, तेजपाल सोनी, हर्ष कुमार श्रीवास्तव, डॉ. मंजुलता श्रीवास्तव, नर्मदा प्रसाद नरम, नागेन्द्र दुबे, समीर दीवान, चेतन भारती, शिव प्रसाद सोनी, शीलकांत पाठक, डॉ. अर्चना पाठक, नरेश दुबे नवनीत, प्रोफेसर पी. सी. अग्रवाल, रवि गहलोत, उमा तिवारी, शैलजा शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। पश्चात उपस्थित साहित्यकारों द्वारा कविता पाठ भी किया गया। राजेंद्र ओझा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के बाद अंत में स्वर्गीय प्रभाकर चौबे को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

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