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भारत-अमेरिका के बाद अब जापान की ड्रैगन के उत्पादों पर स्ट्राइक

इस बार हमला भारत के मित्र जापान की तरफ से हुआ

चीन पर चौतरफा हमला: भारत के साथ सीमा विवाद के बीच चीन पर चौतरफा हमले हो रहे हैं। अमेरिका की तरफ से दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर बीजिंग को घेरा जा रहा है तो भारत डिजिटल स्ट्राइक कर चीनी कंपनियों का देश से बोरिया-बिस्तर समेटने में लगा हुआ है। वहीं, इस बार हमला भारत के मित्र जापान की तरफ से हुआ है।

दरअसल, जापान ने कहा है कि वह उन जापानी कंपनियों को सब्सिडी प्रदान करेगा, जो चीन के बजाय आसियान देशों में अपने सामान को तैयार करेंगी। साथ ही जापान ने भारत और बांग्लादेश को भी इस सूची में शामिल किया है, जहां जापानी कंपनियां अपने उत्पाद तैयार कर सकती हैं। इस तरह जापान के इस फैसले से दोनों देशों को खासा लाभ होगा।

जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय (एमईटीआई) ने कहा है कि वह उन जापानी निर्माताओं को सब्सिडी प्रदान करेगा जो चीन के बजाय आसियान देशों में अपने सामान को तैयार करेंगे। अब मंत्रालय ने भारत और बांग्लादेश को इस स्थानांतरण गंतव्य की सूची में शामिल किया है।

निक्केई की रिपोर्ट के अनुसार,

जापान का लक्ष्य एक विशेष क्षेत्र पर अपनी निर्भरता को कम करना है और एक ऐसी प्रणाली का निर्माण करना है जो चिकित्सा सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की एक स्थिर आपूर्ति प्रदान करने में सक्षम हो।

जापानी सरकार ने आसियान क्षेत्र में अपने विनिर्माण स्थलों को फैलाने के लिए कंपनियों को प्रोत्साहित करने के लिए सब्सिडी के तौर पर 2020 के पूरक बजट में 23.5 बिलियन येन आवंटित किया है।

तीन सितंबर से शुरू हुए अनुप्रयोगों के दूसरे दौर के साथ आसियान-जापान आपूर्ति श्रृंखला को लचीला बनाने के लिए बांग्लादेश को इन परियोजनाओं को सूची में जोड़ा गया। अनुप्रयोग का दूसरा दौर विकेंद्रीकृत विनिर्माण स्थलों, सुविधाओं के प्रयोगात्मक परिचय और मॉडल परियोजनाओं के कार्यान्वयन पर जोर देता है। निक्केई ने कहा कि सब्सिडी की कुल राशि कई बिलियन येन तक पहुंच सकती है।

जापानी कंपनियों की आपूर्ति श्रृंखला वर्तमान में चीन पर बहुत निर्भर करती है। कोविड-19 महामारी के दौरान इस आपूर्ति में कटौती की गई थी। जून में बंद हुए आवेदन के पहले दौर में, जापान सरकार ने 30 विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिसमें वियतनाम और लाओस में होया की इलेक्ट्रॉनिक घटक परियोजना शामिल है और इसके लिए उसे 10 बिलियन येन की सब्सिडी प्रदान की गई।

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