कठिनाइयों से डरने के बजाए सामना करने से मेहनत रंग लाती है: प्रमोद

अंकित मिंज

बिलासपुर।

एक बार मैं एक कार्यक्रम देखने पहुंचा। वहां डांस देखने के लिए बहुत से लोग पहुंचे थे लेकिन जब डांस खत्म हुआ तो उस आर्टिस्ट को देखकर बहुत सारे लोग उससे हाथ मिलाने के लिए पहुंचे। उसको देखकर लगा की यदि इज्जत पाना है तो इस तरह का काम करना चाहिए। वहीं से मैंने डांस में मुकान बनाना तय किया और 2004 से मैंने डांस सीखने की शुरुआत की।

मेरा फैमिली बैक ग्राउण्ड बहुत ही कमजोर रहा, आर्थिक स्थिति कमजोर थी जिसके कारण मुझे बहुत सी समस्या का सामना करना पड़ा। पहले मैं एक गिफ्ट शॉप में काम करता था जहां 500 रुपए मिलता था। उसी से मैं अपना पूरा खर्च चलाता था। डांस सिखना भी उन्हीं रुपयों से शुरू किया। फिर नागपुर, उसके बाद दिल्ली वहां पर जाकर डांस सिखने लगा। बहुत कठिनाई आई लेकिन मुझे जो चाहिए था उसके लिए मैं जुटा रहा।
प्रशिक्षण देने का कार्य कब से कर रहे।

मैं जब खुद डांस सीखता था तब मुझे बहुत परेशानी हुई थी। 2008 से मैं शहर में ही बच्चों को डांस का प्रशिक्षण देता हूं। ऐसे बच्चों के लिए कार्य करता हूं जो निचले तबके के है और जिनको सिखाने वाला कोई नहीं है। निःशुल्क डांस के शिविर साल में 6 बार करता हूं।

युवाओं को क्या संदेश देना चाहते हैः

आज के युवाओं में धैर्य का अभाव है। अपने लक्ष्य से बार-बार भटकते हैं। मेहनत कम और फल जल्दी चाहते है। लेकिन सफलता के लिए हर कठिन से कठिन परिस्थिति का सामना करना होगा। यदि मेहनत पूरा करेंगे तो एक न एक दिन सफलता मिलती ही है। मेहनत करे और निराश न हों।

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