छत्तीसगढ़

विद्यार्थी जीवन त्याग, तपस्या एवं संयम का समय

राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ राज्य बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष श्री खूबचंद पारख ने कहा कि विद्यार्थी जीवन त्याग, तपस्या एवं संयम का समय होता है। उन्होंने कहा कि इस कालखंड का सद्उपयोग करने वाले विद्यार्थी तप कर कुंदन की भांति अपने व्यक्तित्व का परिष्कार करता है। श्री पारख रविवार 24 सितम्बर को शासकीय पोष्ट मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास महेश नगर राजनांदगांव में आयोजित छात्रसंघ के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर निगम के महापौर श्री मधुसूदन यादव किया। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य आयोग सदस्य श्री अशोक चौधरी, शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. केके सहारे, श्री ओजस दास, श्री नीलकंठ गढ़े, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति छात्र संगठन के पूर्व जिला अध्यक्ष श्री चंद्रेश ठाकुर, एवं श्री विष्णु देव ठाकुर उपस्थित थे।
इस अवसर पर श्री पारख ने विद्यार्थी जीवन के महत्ता पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को छात्र जीवन का सद्उपयोग कर राष्ट्र व समाज के नवनिर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने विद्यार्थियों को पूरे मनोयोग के साथ विद्या अध्ययन करने के साथ-साथ नैतिक एवं मानवीय गुणों को भी आत्मसात करने की सीख दी। उन्होंने विद्यार्थियों को आश्वस्त किया कि छात्रावासी छात्रों को जब भी उनकी आवश्यकता होगी, वे मदद हेतु सदैव उपलब्ध रहेगें। इस अवसर पर श्री पारख ने छात्रावास के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शपथ दिलाई। महापौर श्री मधुसूदन यादव ने इस छात्रावास की गौरवशाली परंपरा के साथ-साथ अध्ययन-अध्यापन के अनुकूल परिवेश एवं व्यवस्था, अनुशासन एवं भाई चारे की भी भूरी-भूरी प्रशंसा की। इस अवसर पर उन्होंने छात्रावास के मांगों एवं समस्याओं का निराकरण करने का आश्वासन भी दिलाया। राज्य खाद आयोग के सदस्य श्री अशोक चौधरी ने राष्ट्र व समाज के विकास में विद्यार्थियों के योगदान पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को राष्ट्र के अमूल्य संसाधन बताया। छात्रावास के पूर्व अध्यक्ष एवं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति छात्र संगठन के पूर्व जिला अध्यक्ष श्री चंद्रेश ठाकुर ने छात्र जीवन एवं छात्रावासी जीवन के महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थी जीवन को व्यक्ति का जीवन का स्वर्णीम काल बताया। श्री ठाकुर ने कहा कि छात्रावास विद्यार्थियों के लिए संरक्षण स्थली एवं संस्कार भूमि होता है। जहां पर विद्यार्थियों को जीवन की बुनियादी तमीज सिखलाई जाती है।

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