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सबरीमाला विवाद: दो महिलाओं को फिर मंदिर जाने से रोका, स्थिति तनावपूर्ण

नई दिल्ली:

भगवान अयप्पा के मंदिर तक पहुंचने के लिए सबरीमला पहाड़ी की चढ़ाई करने की कोशिश करने वाली रजस्वला आयु वर्ग की दो महिलाओं को श्रद्धालुओं के निरंतर विरोध प्रदर्शन के चलते दर्शन किए बिना ही लौटने पर मजबूर होना पड़ा। बिंदु और कनकदुर्गा का यह प्रयास चेन्नई के संगठन मानिथि की 11 महिला कार्यकर्ताओं के मंदिर पहुंचने की, एक दिन पहले की असफल कोशिश के बाद हुआ है।

सोमवार सुबह करीब चार बजे पंबा पहुंचने वाली दोनों महिलाओं को सन्निधानम(मंदिर परिसर) से एक किलोमीटर पहले अप्पाचीमेदु और मराकूटम में श्रद्धालुओं के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा।

पुलिस की सुरक्षा में आगे बढ़ रही महिलाओं को रोकने के लिए अयप्पा श्रद्धालु बड़ी संख्या में एकत्रित हो गए और करीब एक घंटे तक पुलिस के साथ भी उनकी नोंकझोंक चली। पुलिस ने वापस जाओ चिल्ला रहे और अयप्पा मंत्रोच्चारण कर रहे श्रद्धालुओं को हटाने की कोशिश की लेकिन किसी भी सूरत में पीछे हटने को नहीं तैयार अशांत श्रद्धालुओं के कारण माहौल तनावपूर्ण हो गया।

छोटे बच्चों समेत प्रदर्शनकारियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए और स्थिति अनियंत्रित हो जाने के भय से पुलिस ने महिलाओं को लौट जाने की सलाह दी। इन महिलाओं को इससे पहले श्रद्धालुओं ने सबरीमला के रास्ते में पडऩे वाले अप्पाचीमेदु में रोक दिया था जिन्हें बाद में पुलिस ने हटा दिया।

भाजपा ने भी दो इन महिलाओं के घर के सामने प्रदर्शन शुरू कर दिया था। कनकदुर्गा के बेहोश हो जाने की खबरों के बीच बिंदु ने संवाददाताओं को बताया कि उनको रोकने के लिए झूठ बोला गया और उनके साथ कुछ भी ऐसा नहीं हुआ। पुलिस ने जबरन उन्हें मंदिर जाने से रोका।

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद से अब तक मंदिर में 10-50 आयु वर्ग की कोई भी महिला प्रवेश नहीं कर पाई हैं। इस आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर पारंपरिक रूप से रोक लगी हुई थी।

सभी आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत देने वाले 28 सितंबर के फैसले को लेकर केरल में श्रद्धालुओं एवं भाजपा ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया है। वार्षिक तीर्थयात्रा का पहला चरण 27 दिसंबर को खत्म होने वाला है और पिछले कुछ दिनों से यहां श्रद्धालुओं की काफी भीड़ नजर आ रही है।

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