स्वास्थ्य के क्षेत्र में बिहार को आशातीत सफलता

बिहारशरीफ़ : सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) के 2019 बुलेटिन में आंकड़े बिहार के लिए बेहद ही ख़ुशी देने वाले है. राज्य में शिशु मृत्यु दर जो 2016 में 38 थी 2017 (जिसका प्रकाशन मई 2019 में हुआ) में घटकर 35 पर आ गयी है. प्रति हजार मृत्यु दर में भी बिहार में कमी आई है और यह 2016 में 6.0 से घटकर 5.8 हो गया है जो कि राष्ट्रीय मृत्यु दर 6.3 से बहुत कम है. इसके साथ ही जन्म दर भी 26.8 से घटकर 26.4 रह गया है. ज्ञात हो कि ‘एसआरएस’ रजिस्ट्रार जनरल ऑफ़ इंडिया द्वारा जारी किया जाता है.

स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने कहा यह बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि बिहार के शिशु मृत्यु दर में 3 पॉइंट का कमी आई है जो एक बड़ी उपलब्धी है. इसके साथ ही जेंडर आधारित भेदभावपूर्ण अंतर में भी कमी आई है. 2016 में लडको का शिशु मृत्यु दर 31 एवं लड़कियों का 46 था अर्थात 15 पॉइंट का अंतर था जो कि 2017 में घटकर 3 पॉइंट का रह गया है.

क्या है कारण इस बदलाव के: प्रधान सचिव संजय कुमार के अनुसार शिशु मृत्यु दर में आये गिरावट के पीछे राज्य में प्रसव पूर्व होने वाले जाँच में आई गुणवतात्मक सुधार एक महत्वपूर्ण कारण है, क्योंकि जाँच के दौरान हीं जोखिम वाले गर्भवती महिलाओं की पहचान कर ली जाती है और उनका विशेष देखभाल किया जाता है. दूसरी बात यह है कि बिहार में प्रतिरक्षण (टीकाकरण) की सुविधा भी बेहतर हुआ है और वर्तमान में यह 84% है. इसके साथ ही सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में बाल चिकित्सा गहन देखभाल इकाई (पिकू) एवं जिला अस्पतालों में बीमार नवजातों के देखभाल के लिए एसएनसीयू (सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट) है. उन्होंने यह भी कहा कि लड़कियों के शादी के उम्र में हुई बढ़ोतरी जैसे सामाजिक करक भी इसमें सहायक है.

जेंडर आधारित अंतर एवं ग्रामीण-शहरी विभेद में आई कमी: एसआरएस बुलेटिन मई 2019 के मुताबिक शिशु मृत्यु दर में 7 प्रतिशत की कमी आई है. आंकड़े के अनुसार ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में शिशु मृत्यु दर के अंतर में भी कमी आई है, वर्ष 2016 में यह अंतर 10 पॉइंट का था जो 2017 में घटकर 5 पॉइंट रह गया है. इतना ही नहीं लडकों एवं लड़कियों के बीच शिशु मृत्यु दर में जो 15 पॉइंट का अंतर था जो घटकर मात्र 3 पॉइंट रह गया है. इसका मतलब यह है कि स्वास्थ्य विभाग ने अपने कार्यक्रमों में जेंडर या शहरी एवं ग्रामीण के बीच के खाई को पाटने का काम किया है.

राष्ट्रीय औसत के करीब पहुँच रहा बिहार: एक बिहार में मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत 6.3 के विरुद्ध 5.8 है अर्थात राष्ट्रीय औसत से नीचे है. वहीँ शिशु मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत 33 के विरुद्ध बिहार का शिशु मृत्यु दर 35 है.

बिहार में आया है बड़ा बदलाव: बड़े राज्यों में शिशु मृत्यु दर में उत्तराखंड के बाद बिहार, हरयाणा, राजस्थान तीन ही राज्य ने 3 पॉइंट के बदलाव लाया है. 21 बड़े राज्यों के समूह में बिहार 2 स्थान उपर बढ़कर 11 वें स्थान पर पहुँच गया है.

शिशु मृत्यु दर में सुधार हेतु किये जा रहे प्रयास: बिहार में शिशु मृत्यु दर में सुधार हेतु – संस्थागत प्रसव के बाद सभी आवश्यक देखभाल एवं जाँच, रेफेरल एवं जिला अस्पतालों में बीमार नवजातों की देखभाल, घर पर नवजात एवं बच्चों के देखभाल हेतु विशेष कार्यक्रम, माँ कार्यक्रम के अंतर्गत अधिकतम स्तनपान पर जोर, विटामिन ‘ए’ एवं आयरन फोलिक एसिड का उपरी खुराक, अतिकुपोषित बच्चों का देखभाल, दस्त एवं स्वांस संक्रमन सम्बन्धी बिमारियों का प्रबंधन, गहन प्रतिरक्षण (टीकाकरण) कार्यक्रम, खसरा एवं जापानीज एन्फेलाईटिस का उन्मूलन, पोलियो का उन्मूलन जैसे प्रयास किये जा रहे हैं. अमानत कार्यक्रम जो कि नर्सों के क्षमतावर्धन पर केन्द्रित है और उनकी दक्षता को विकसित कर मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य में बेहतरी लाने के लिए लक्षित है भी इस दिशा में अहम् भूमिका अदा करती है.

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