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सुमित्रा महाजन ने सार्क देशों से टीम भावना से मिलकर काम करने का किया आह्वान

कोलम्बो: लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सार्क देशों काआह्वान किया है कि वे आपस में मिलकर टीम भावना से काम करें ताकि स्थायी विकास के एजेंडे को 2030 तक की अवधि तक कारगर ढंग से समय पर लागू किया जा सके। श्रीलंका की राजधानी कोलम्बो में सार्क स्पीकरों एवं सांसदों के आठवें सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए श्रीमती महाजन ने आज कहा कि दक्षिण एशियाई क्षेत्र विकास के मामले में अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है और स्थायी विकास के एजेंडे की सफलता उसके सार्क देशों में सही ढंग से लागू होने पर काफी हद तक निर्भर है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि स्थायी विकास के एजेंडे में गरीबी मिटाने को प्रमुख लक्ष्यों में शामिल किया गया है और दुनिया में सबसे तेज गति से विकास कर रहा दक्षिण एशियाई क्षेत्र इन चुनौतियों को बड़े अवसरों में तब्दील कर सकता है।
सार्क स्पीकरों और सांसदों का यह सम्मेलन 2030 तक के लिए स्थायी विकास के एजेंडे को पूरा करने के साझा मंच के तौर पर आयोजित किया जा रहा है।
सम्मेलन का आयोजन ऐसे समय किया गया है जबकि श्रीलंका ने अपने संसदीय लोकतंत्र के 70 साल पूरे किए हैं।इस मौके पर श्रीलंका की संसदका विशेष अधिवेशन भी आयोजित किया गया जिसमें लोकसभा अध्यक्ष ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ अपनी मौजूदगी दर्ज की।
आतंकवाद के मुद्दे पर सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण पाकिस्तान में होने वाला सार्क देशों का शिखर सम्मेलन पिछले साल नहीं हो पाया था और उसके बाद से इस ग्रुप की यह पहली उच्च स्तरीय बैठक है।तीन दिन के इस सम्मेलन का उदघाटन श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला श्रीसेना ने किया।
अपने कोलम्बो प्रवास के दौरान श्रीमती महाजन ने श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला श्रीसेना और प्रधानमंत्री राणिल विक्रमसिंघे से भी मुलाक़ात की। श्रीमती महाजन ने अपने भाषण के दौरान विशेष रूप से भारतीय संसद के स्पीकर्स रिसर्च इनिशिएटिव का जिक्र किया जिसके तहत संसद सदस्यों को विकास से जुड़े मुद्दों की गहराई से जानकारी दी जाती है ताकि वे कानून बनाने की प्रक्रिया और संसदीय बहसों में कारगर ढंग से हिस्सेदारी कर सकें उन्होंने सार्क देशों से कहा कि अगर वे चाहें तो इस पहल का लाभ उठा सकते हैं और श्रेष्ठ प्रथाओं का आदान-प्रदान किया जा सकता है।
भारत में चल रहे समुदाय आधारित कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि उनके अपने गृह नगर इंदौर में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और स्वच्छता अभियान से निचले स्तर पर सकारात्मक बदलाव आए हैं और इसी बल पर उनके शहर को भारत का सबसे स्वच्छ नगर घोषित किया गया है। श्रीमती महाजन ने कहा कि सार्क देशों को दोस्ती, विश्वास और आपसी समझबूझ से साझा चुनौतियों का सामना करना होगा ताकि इन समस्याओं को साझा अवसरों में तब्दील किया जा सके। उन्होंने कहा कि एक दोस्ताना और शांतिपूर्ण पड़ोसी होना बहुत जरूरी है और दुनिया की एक चैथाई आबादी वाले दक्षिण एशिया क्षेत्र को सामूहिक प्रयासों की सख्त जरूरत है।
ऐसे में सार्क देशों की सरकारों, उनके संसद के प्रमुखोंऔर संसद सदस्यों को मिलजुल कर प्रयास करने होंगे। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद के दर्शन का हवाला देते हुए श्रीमतीमहाजन ने कहा कि दक्षिण एशिया के लोगों की भलाई पर केंद्रित विकास के मॉडल की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 2030 के स्थायी विकास के एजेंडे को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय संसदों को अनेक कदम उठाने होंगे जिनमें कानून बनाना, बजट पारित करना और जवाबदेही सुनिश्चित करना शामिल है।उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया में अनेक प्रकार की शासन व्यवस्था होने के बावजूद सहयोग और अनुभवों को साझा करके विकास लक्ष्यों को आसानी से हासिल किया जा सकता है।

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