3.7 लाख कॉन्ट्रैक्ट टीचर्स के लिए खुशखबरी, SC से समान काम के लिए समान वेतन को हरी झंडी

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के 3.7 लाख कॉन्ट्रैक्ट टीचर्स को बड़ी राहत दी है. सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश सरकार की दलिलों को खारिज करते हुए बिहार के नियोजित शिक्षकों को समान काम के लिए समान वेतन देने की बात कही है.  सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि समान काम के लिए समाज वेतन दिया जाए.

जस्टिस एके गोयल और जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने बिहार सरकार की 11 याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को निर्देश दिया कि वह मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाए और कमेटी इन टीचरों की योग्यता के आधार पर सैलरी स्ट्रक्चर तय करे. 

साथ ही कोर्ट ने कमेटी से 4 सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है. मामले की अब अगली सुनवाई 15 मार्च को होगी

मामले में अगली सुनवाई 15 मार्च को

कोर्ट ने कमेटी से चार सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट अब मामले की अगली सुनवाई 15 मार्च को करेगा. बिहार सरकार की ओर से वकील गोपाल सिंह, मनीष कुमार, मुकुल रोहतगी, गोपाल सुब्रमण्यम ने पैरवी की. वहीं नियोजित टीचरों की ओर से वरिष्ठ वकील अमरेंद्र शरण व अन्य ने पैरवी की. 

नियोजित टीचरों के वकील ने दी ये दलील

सुप्रीम कोर्ट में नियोजित टीचरों की ओर से पेश वकीलों ने दलील दी कि ऐसे टीचर सरकारी टीचरों के बराबर काम करते हैं. नियोजित टीचरों की सेवा शर्त, सैलरी आदि राज्य सरकार ही तय करती है. चूंकि दोनों टीचर एक तरह के काम करते हैं, ऐसे में समान काम के लिए समान वेतन मिलना चाहिए. समान काम के लिए समान वेतन न देना गैर संवैधानिक है. नियोजित टीचरों की ओर से कहा गया कि समान वेतन देने पर राज्य सरकार को 9,800 करोड़ रुपये अतिरिक्त आर्थिक भार आएगा. साथ ही यह भी दलील दी गई कि टीचरों पर होने वाले खर्च में से 60 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार देती है. राज्य सरकार केंद्र के फंड को भी खर्च नहीं करती.

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