राष्ट्रीय

सुप्रीम कोर्ट ने ब्लू व्हेल गेम पर मांगा सरकार से जवाब

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने ब्लू व्हेल जैसे वर्चुअल गेम रोकने के लिये दायर याचिका पर को सरकार से जवाब मांगा. इस खेल की वजह से कई व्यक्तियों ने कथित रूप से आत्महत्या कर ली है. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनंजय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने सरकार से कहा कि ऐसे खेल के बारे में ‘फायरवाल’ का सृजन किया जाये.फायरवाल एक ऐसी प्रणाली है जो किसी प्राइवेट नेटवर्क द्वारा नियंत्रित आने और जाने वाली सामग्री को रोकती है.

पीठ ने सभी हाई कोर्ट को ऐसी याचिकाओं पर विचार करने से भी रोक दिया है. शीर्ष अदालत पहले ही तमिलनाडु के 73 वर्षीय व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई कर रही है. इस याचिका में ब्लू व्हेल चैलेंज गेम पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया गया है जिसे दुनिया भर में कई बच्चों की कथित मौत से जोड़ा जा रहा है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने 22 अगस्त को ऐसी ही एक याचिका पर फेसबुक, गूगल और याहू से जवाब मांगा था.

इस याचिका में ब्लू व्हेल चैलेंज के लिंक हटाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है. मद्रास हाई कोर्ट ने चार सितंबर को इस गेम पर गंभीर रुख अपनाते हुये केंद्र और तमिलनाडु सरकार को इस पर प्रतिबंध लगाने की संभावनाएं तलाशने का निर्देश दिया था.

दिल्ली हाई कोर्ट ने बाद में 19 सितंबर को निर्देश दिया था कि इस गेम पर प्रतिबंध लगाने के बारे में मद्रास हाई कोर्ट के निर्देशों पर उठाये गये कदमों पर अमल के बारे में जानकारी पेश की जाये. ब्लू व्हेल चैलेंज के बारे में कहते हैं कि यह आत्महत्या कराने वाला खेल है जिसमें हिस्सा लेने वाले खिलाड़ी को 50 दिन की अवधि में चुनिंदा चुनौतियां पूरी करनी होती हैं और इसमें अंतिम काम आत्महत्या करने का होता है.

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ब्लू व्हेल गेम
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