राफेल सौदा पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई सहमती

याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

नई दिल्ली : मोदी सरकार ने फ्रांस से राफेल लड़ाकू जेट खरीदने का सौदा किया था और इस सौदे के लिए मोदी सरकार ने यूपीए के कार्यकाल में किए सौदे को निरस्त कर दिया था।

इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगले हफ्ते भारत और फ्रांस के बीच राफेल लड़ाकू जेट सौदे पर जनहित याचिका पर सुनवाही करने पर सहमती जताई है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा और जस्टिस ए एम खानविल्कर और डी वाई चन्द्रचुद की एक खंडपीठ ने वकील एम एल शर्मा की सबमिशन पर विचार किया.

उनकी याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। अपने पीआईएल में, शर्मा ने फ्रांस के साथ लड़ाकू जेट सौदे में विसंगतियों का आरोप लगाया और उस पर रोक लगाने की मांग करी है।

इस सौदे पर शुरुवात से ही सवाल खड़े होते रहे है लेकिन ज्यादा कुछ हुए नहीं लेकिन इस बार के मानसून सेशन में राहुल गांधी ने इस मुद्दे को उठाया और तब से राहुल गांधी और कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे है।

आपको बता दे की इससे पहले पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस कर राफले सौदे पर केंद्र के खिलाफ हमला बोला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रक्षा सौदे राफेल के बारे में सवाल किए।

मीडिया को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा, “लोग पूछ रहे हैं कि यह विमान क्या है? अब तक इस देश में कोई भी विमान नहीं आया है। यह आपातकालीन खरीद क्या है? क्या आप सात साल बाद डिलीवरी तिथि को आपातकालीन खरीद कहते है ?

प्रधानमंत्री ने अप्रैल 2015 को कहा कि हम 36 विमान खरीद रहे है, लेकिन आज तक भारत में एक विमान भी नहीं पहुंचा है। पहला विमान सितंबर 2019 के करीब में आएगा और 36 विमानों को आने में साल 2022 तक समय लगेगा। क्या ये है आपातकालीन परियोजना ? ”

वहीं सरकार का कहना है की उन्होंने इस सौदे को कांग्रेस की सरकार से सस्ते में ख़रीदा है लेकिन वो देश की सुरक्षा के चलते राफेल के दाम नहीं बता सकती है।

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