राष्ट्रीय

धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, समलैंगिकता नहीं अपराध

पांच जजों की पीठ ने सुनाया फैसला

नई दिल्ली । भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 की वैधानिकता पर सुप्रीम कोर्ट ने आज ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट में समलैंगिकता पर पांच जजों की पीठ ने फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस ने फैसला पढ़ते हुए विलियम शेक्सपियर को भी कोट किया।

कोर्ट में फैसला सुनाए जाते वक्त वहां मौजूद तमाम लोग भावुक हो गए, कुछ तो रोने भी लगे। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच कर रही है जिसमें जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदू मल्होत्रा शामिल हैं।

देश में दो बालिगों के बीच समलैंगिक संबंध अब अपराध नहीं हैं। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने दो बालिगों के बीच सहमति से बनाए गए समलैंगिक संबंधों को अपराध मानने वाली धारा 377 को खत्म कर दिया है।

इसके पहले 10 जुलाई को हुई थी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को मनमाना करार देते हुए व्यक्तिगत चॉइस को सम्मान देने की बात कही। सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह दिसंबर 2013 को सुनाए गए अपने ही फैसले को पलट दिया है।

सीजेआई दीपक मिश्रा, के साथ जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की संवैधानिक पीठ ने 10 जुलाई को मामले की सुनवाई शुरु की थी और 17 जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, समलैंगिकता नहीं अपराध
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