सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री का मामला SC ने संवैधानिक पीठ को सौंपा

केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री के मामले को सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक पीठ को सौंप दिया है। साथ ही पीठ से कई अहम सवाल भी किए। अदालत ने पूछा कि मंदिर में महिलाओं की एंट्री पर रोक क्या समानता के अधिकार का हनन है? कोर्ट ने यह भी कहा कि क्या इस तरह की रोक लगाई जाना ठीक है?

ये मामला लंबे समय से कानूनी कार्यवाही का सामना कर रहा है। इससे पहले महिला कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने करीब 100 अन्य महिलाओं के साथ सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की योजना बनाई थी और वे हाजी अली दरगाह, शनिशिगनापुर और त्रयंबकेश्वर मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के हक में अभियान चला चुकी हैं।

दूसरी ओर मंदिर प्रशासन के प्रवक्ता कडकमपल्ली सुरेंद्रम ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि, ‘सबरीमाला मंदिर का प्रशासन त्रावणकोर देवासोम बोर्ड के हाथों में है और सभी को इसके बनाये नियमों को मानना पड़ेगा।’ वहीं केरल सरकार साल 2007 में मंदिर प्रशासन के समर्थन में आई थी और कहा था कि धार्मिक मान्यताओं की वजह से महिलाओं को एंट्री नहीं दी जा सकती।

बता दें कि महिलाओं के मंदिर में प्रवेश निषेध का मुद्दा पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष है और जब तक इस मामले में कोई निर्णय नहीं आ जाता तब तक परंपराओं और रीति रिवाजों में कोई परिवर्तन नहीं होगा। बता दें कि सबरीमाला के भगवान अयप्पा मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं का प्रवेश निषेध है।

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