सूरजपुर : मुखिया दंतैल हाथी पर लगाया गया सैटेलाइट कॉलर, होगा ये फायदा

सरगुजा वनवृत्त में सर्वाधिक आक्रामक 16 सदस्यीय बांकी दल के मुखिया दंतैल हाथी को गुरुवार की दोपहर सूरजपुर जिले के धूमाडांड़ जंगल में ट्रेंक्यूलाइज कर सटेलाइट कॉलर लगाने का ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।

सूरजपुर जिले के प्रतापपुर व सूरजपुर वन परिक्षेत्र में लंबे समय से जमे बांकी दल के 16 हाथियों द्वारा लगातार फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ मकानों में भी तोड़फोड़ की जा रही थी।

दल के मुखिया दंतैल हाथी पर सैटेलाइट कालरिंग के लिए पिछले चार दिनों से वन्य जीव संस्थान देहरादून के वैज्ञानिकों के साथ विशेषज्ञ और स्थानीय वन अधिकारी-कर्मचारी लगे हुए थे।

सरगुजा वनवृत्त में सर्वाधिक आक्रामक 16 सदस्यीय बांकी दल के मुखिया दंतैल हाथी को गुरुवार की दोपहर सूरजपुर जिले के धूमाडांड़ जंगल में ट्रेंक्यूलाइज कर सटेलाइट कॉलर लगाने का ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।

जिस दौरान दंतैल हाथी को डार्ट किया गया, उस समय वह महान नदी की ओर जा रहा था। डार्ट लगने के कुछ देर बाद ही हाथी गिर गया। बड़े आराम से वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की टीम ने उसे सैटेलाइट कॉलर पहनाया। रिवाइवल डोज देने के कुछ मिनटों के बाद ही हाथी उठ खड़ा हुआ।

पिछले तीन दिनों से निराशा हाथ लग रही थी, क्योंकि सभी 16 हाथी घनी झाड़ियों के बीच झुंड से अलग हो ही नहीं रहे थे। गुरूवार को फिर एक बार ऑपरेशन चलाया गया। अंबिकापुर से पूरे साजो-सामान के साथ टीम सुबह नौ बजे ही सूरजपुर वन परिक्षेत्र के धूमाडांड़ के लिए रवाना हो गई थी।

वन्य जीव संस्थान देहरादून से आए वैज्ञानिकों के साथ तमिलनाडु के ट्रैकर जंगल में घुसकर हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे।

शाम लगभग चार बजे दल का मुखिया दंतैल हाथी जंगल के रास्ते महान नदी की ओर बढ़ा, उसी दौरान विशेषज्ञों ने अचूक निशाना लगाया। ट्रेंक्यूलाइज गन से डार्ट लगते ही विशालकाय हाथी अर्द्घचेतन अवस्था में आ गया। थोड़ी देर बाद ही वह जमीन पर गिर गया।

पहले से तैयार विशेषज्ञ व वैज्ञानिकों की टीम तत्काल जमीन पर गिरे दंतैल के पास पहुंची और प्रक्रिया के तहत हाथी की आंखों पर हरा कपड़ा रख दिया ताकि थोड़ा भी होश आने पर वह कुछ देख न सके।

भारी भरकम सैटेलाइट कॉलर उसके गले में पहनाया गया। लगभग 50 मिनट के भीतर सैटेलाइट कालरिंग की सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद विशेषज्ञों ने होश में लाने के लिए हाथी पर रिवाइवल डोज भी लगा दिया। जंगल से दल के सारे सदस्य बाहर लौट आए और दूर से दंतैल पर नजर रहे। कुछ देर बाद धीरे-धीरे दंतैल उठ खड़ा हुआ और उस ओर बढ़ गया, जहां पहले से दल के दूसरे सदस्य मौजूद थे।

ऑपरेशन में 48 लोगों की टीम रही शामिल

बांकी दल के दंतैल हाथी पर कालरिंग के सफल ऑपरेशन में 48 लोगों की टीम लगी थी। सीसीएफ केके बिसेन के नेतृत्व में वन्य जीव संस्थान देहरादून के डा. पराग निगम, डा. विभाष पाण्डव, डा. सम्राट, नंदन वन रायपुर के डा. जेके जड़िया, कानन पेंडारी बिलासपुर के डा. चंदन, वरिष्ठ पशु चिकित्सक व वन्य प्राणियों को ट्रेंक्यूलाइज करने के विशेषज्ञ डा. सीके मिश्रा, सीनियर बायोलाजिस्ट डा. लक्ष्मीनारायण, अंकित कुमार, तमिलनाडु के 10 ट्रैकर के अलावा स्थानीय वन अमले से डिप्टी डायरेक्टर एलिफेंट रिजर्व अरविंद, कृष्णु चंद्राकर, जगतराम, रामकिशोर मरावी, प्रेमकांत तिवारी, हाथी विशेषज्ञ प्रभात दुबे, अमलेंदू मिश्रा, रामनरेश तिवारी, महेंद्र पाठक के अलावा हाथी मित्र दल के सदस्य शामिल रहे। टीम के एक-एक सदस्य को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई थी। सभी सदस्यों ने बखूबी अपने दायित्वों का निर्वहन किया।

यह होगा फायदा

सीसीएफ केके बिसेन ने बताया कि सरगुजा वनवृत्त में हाथियों के जितने भी दल घूम रहे हैं, उसमें बांकी दल सबसे अधिक समस्यामूलक दल था।

इस दल के सभी सदस्य आक्रामक थे। फसलों के साथ मकानों को भी इनके द्वारा नुकसान पहुंचाया जा रहा था। दल के मुखिया दंतैल हाथी पर सैटेलाइट कॉलर लग जाने के बाद पूरे दल की निगरानी सैटेलाइट के जरिए आसानी से की जाएगी।

इस दल की पल-पल की जानकारी और विचरण क्षेत्र के संबंध में वस्तुस्थिति स्पष्ट हो जाने से संबंधित क्षेत्र में बचाव के उपाय किए जाएंगे। हाथियों की मौजूदगी वाले स्थल की जानकारी मिल जाने से बचाव के उपाय करने में सहायता मिलती है।

तीसरा हाथी जिसे लगाया गया सैटेलाइट कॉलर

सरगुजा वनवृत्त में कुल तीन हाथियों को सैटेलाइट कॉलर लगाया जा चुका है। सबसे पहले बहरादेव हाथी पर सैटेलाइट कालरिंग की गई थी।

उसके बाद मैनपाट में विचरण करने वाले हाथियों के दल की मुखिया हथिनी गौतमी पर सैटेलाइट कॉलर लगाया गया था।

कालरिंग के बाद बहरादेव और गौतमी दल की पल-पल की जानकारी सैटेलाइट के जरिए मिलती है। गुरुवार को बांकी दल के दंतैल पर कालरिंग की गई।

आसान नहीं था ऑपरेशन

पिछले चार दिन से विशेषज्ञ व वैज्ञानिक कालरिंग के काम में लगे थे। चौथे दिन ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया गया। यह आसान काम नहीं था।

दल के 16 हाथी धूमाडांड़ जंगल में मौजूद थे। रोज की तरह दल का मुखिया सबसे पहले पानी पीने के लिए महान नदी की ओर आगे बढ़ा। उसी दौरान उसे डार्ट मारा गया।

शेष 15 हाथी 15 से 20 मीटर दूर झाड़ियों में मौजूद थे। कुछ दूर चलने के बाद दंतैल जमीन पर गिर गया।

विशेषज्ञ, वैज्ञानिक व ट्रैकर जमीन पर गिरे हाथी की ओर बढ़े। डर था कि दूसरे हाथी उसी रास्ते में न आ जाएं, इसलिए ट्रैकरों को निगरानी में लगाया गया था।

अधिकारियों ने बताया कि तीन दिन के व्यवहार अध्ययन में पता चल गया था कि जबतक दंतैल की ओर से सिग्नल नहीं मिलता, दूसरे हाथी बाहर नहीं निकलते।

इसी उम्मीद पर कालरिंग की जाने लगी। अचानक हाथियों की हलचल सुनाई देने पर ट्रैकरों ने मोर्चा संभाला और आसानी से ऑपरेशन को पूरा किया गया।

वजन 5299 किलो

जिस हाथी पर कालरिंग की गई, उसका वजन 5299 किलोग्राम का है। अबतक इस हाथी ने लगभग 20 लोगों को मौत के घाट उतारा है।

50 से अधिक साइकिल, बाइक क्षतिग्रस्त करने के साथ ही फसलों और मकानों को नुकसान पहुंचाने में यह हाथी दल का नेतृत्व किया करता था।

कुछ दिन पहले इसी दल में बहरादेव भी शामिल हो गया था। उस दौरान बहरादेव दल का नेतृत्व कर रहा था। दंतैल पर लगाया गया कॉलर दक्षिण अफ्रीका से निर्मित है।<>

 

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