ओटी में मरीजों काे खुद लाने पड़ रहे सर्जिकल सामान

अंकित मिंज

बिलासपुर।

स्टिचिंग धागे से लेकर सेनेटरी पैड सहित, कैटगठ, वाइग्रीन से लेकर यूरो बैग, कैथेटर, निडिल के लिए करीब 2-3 हजार रुपए रुपए जेब में हों तो इमरजेंसी में प्रसव के लिए जिला अस्पताल स्थित 100 बिस्तर अस्पताल में जाएं वरना समस्या आ सकती है। यहां प्रसूताओं को ही सर्जिकल आइटम खरीदकर डाॅक्टर को देना पड़ता है। सेनेटरी पैड व स्टिचिंग धागा तक खत्म हो चुका है।

स्टाफ का कहना है कि वे मजबूर हैं। ये सामान काफी समय से स्टोर में नहीं हैं। इतना ही नहीं यहां पर इलाज कराना है तो सर्जिकल आइटम के साथ साथ दवा भी बाहर से खरीदनी होगी। दरअसल सर्जरी के दौरान होने वाली दवा व अन्य सर्जिकल आइटम नहीं होने से जिस मरीज का ऑपरेशन होता है, उसे सामान लिखकर दे दिया जाता है। पिछले एक माह से 100 बिस्तर मातृ शिशु अस्पताल में दवाओं का टोटा है।

निशुल्क दवा और जननी शिशु सुरक्षा योजना में प्रसूताओं के लिए दवा स्टिचिंग धागे, ऑपरेशन, भोजन, परिवहन से लेकर रजिस्ट्रेशन तक सब कुछ फ्री है। जिला अस्पताल में 453 प्रकार में से 326 प्रकार की दवाइयां बची हैं। इस संबंध में आरएमओ मनोज जायसवाल का कहना है कि उन्हें सामान सीजीएमएसडब्ल्यू खरीदकर देता है। स्टोर में खत्म हैं या नहीं इसकी उन्हें जानकारी नहीं है, वे पता लगाएंगे।

कलेक्टर के आदेश के बाद भी अस्पताल में सफाई नहीं

कलेक्टर के निर्देश के बाद भी जिला अस्पताल स्थित 100 बिस्तर मातृ शिशु अस्पताल में सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यहां अभी भी गंदगी पसरी हुई है। जिला अस्पताल में 5 जनवरी को कलेक्टर संजय मलंग ने औचक निरीक्षण कर सफाई पर ध्यान देने के लिए कहा था।

उन्होंने इसके लिए अस्पताल प्रबंधन से नाराजगी भी जताई थी। उन्होंने अस्पताल में तीन-तीन बार सफाई कराने भी दिए निर्देश दिए थे। 100 बिस्तर मातृ शिशु अस्पताल की साफ सफाई का जिम्मा उन्होंने अपर कलेक्टर बीएस उइके को दिया है।

कलेक्टर के दौरे के दूसरे व तीसरे दिन तक यहां सबकुछ ठीक रहा पर इसके बाद सफाई व्यवस्था का फिर से बुरा हाल हो गया। अस्पताल अब पहले जैसे स्थिति में आ गई है। पहली, दूसरी मंजिल पर सबसे अधिक गंदगी है। यहां के टॉयलेट व बाथरूम जाम हैं। इनके भीतर पानी बाहर बह रहा है। इससे प्रसूताओं व नवजातों पर संक्रमण का खतरा है।

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