सर्वे : मोबाइल एप केवल नकल के लिए, पढ़ाई के लिए अब भी ब्लैकबोर्ड का इस्तेमाल

भारत कभी विश्वगुरू से विख्यात था। हाल ही में ब्रिटेन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के संगठन कैम्ब्रिज असेसमेंट इंटरनेशनल एजुकेशन ने एक सर्वे किया।

इसी साल मार्च से मई में किए गए सर्वे में दुनियाभर से 20 हजार टीचरों और बच्चों को शामिल किया गया। भारत से इसमें 4453 टीचर और 3927 छात्रों की राय ली गई।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर के देशों में औसतन 35% ब्लैकबोर्ड रह गए हैं, अब वहां मोबाइल एप से स्मार्टफोन पर पढ़ाई हो रही है लेकिन भारत के स्कूलों में अभी भी 67% पढ़ाई ब्लैकबोर्ड पर हो रही है। मोबाइल एप का उपयोग केवल नकल के लिए रह गया है।

-सब्जेक्ट को लेकर अपडेट रहने में स्मार्टफोन मददगार

मिली जानकारी अनुसार, सर्वे के मुताबिक, भारतीय कक्षाओं में स्मार्टफोन, टैबलेट या व्हाइट बोर्ड (पेन से लिखा जाने वाला) का इस्तेमाल काफी कम होता है। शोध के मुताबिक, दुनिया के महज एक तिहाई छात्रों ने पढ़ाई के दौरान ब्लैकबोर्ड या चॉक के इस्तेमाल की बात कही।

वहीं भारत में ऐसा कहने वाले दो तिहाई छात्र हैं। सर्वे में बताया कि ज्यादातर देशों में स्मार्टफोन-टैबलेट के साथ पेन-पेपर-ब्लैकबोर्ड का इस्तेमाल होता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्मार्टफोन के जरिए पढ़ाने से टीचर बच्चों से न केवल ज्यादा जुड़े रहते हैं बल्कि वे विषय को लेकर ज्यादा अपडेट भी रह सकते हैं।

– केवल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस देना ही काफी नहीं

एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि छात्रों को केवल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस देने भर से उन्हें काबिल नहीं बनाया जा सकता।

2005 में पेरू में स्कूली छात्रों में कम्प्यूटर की तादाद बढ़ाने के लिए वन लैपटॉप पर चाइल्ड कार्यक्रम शुरू किया गया था।

लेकिन छात्रों के गणित और भाषा पर इसका बेहद कम प्रभाव पड़ा।

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