राष्ट्रीय

कोरोना के बाद आया स्वाइन फ्लू और सर्दी खांसी वाले वायरल बुखार का मौसम

केंद्र ने सभी राज्यों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए

नई दिल्ली: भारत में कोरोना के मरीजों की संख्या अब तेजी से घट रही है. जाहिर है कि ऐसे में सरकार ये बिल्कुल नहीं चाहेगी कि मौसमी बीमारियां कोरोना के सुधरते ग्राफ को बिगाड़ दें. पांच सप्ताह से भारत में कोरोना के आंकड़ों में सुधार है.

केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 9 से 15 सितंबर वाले सप्ताह में औसतन 92830 प्रतिदिन थी. 16 से 22 सितंबर वाले सप्ताह में ये घटकर 90346 प्रतिदिन पर आ गई. 23 से 29 सितंबर वाले सप्ताह में ये औसत तेजी से घटा और 83232 प्रतिदिन पर आ गया. दोनों सप्ताहों में मरीजों के घटने का सिलसिला और तेज हुआ.

30 सितंबर से 6 अक्टूबर वाले सप्ताह में 77113 प्रतिदिन और 7 अक्टूबर से 13 अक्टूबर के बीच कोरोना मरीजों की संख्या औसतन 72576 प्रतिदिन पर आ गई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने माना कि पिछले सात दिनों में केवल दक्षिण पूर्व एशिया में कोरोना वायरस के मामलों में कमी आई है और इसकी वजह है कि भारत में कोरोना काबू में आया है.

वहीँ अब डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया, स्वाइन फ्लू और सर्दी खांसी वाले वायरल बुखार का मौसम आ चुका है. ऐसे में कोरोना और दूसरे बुखार के बीच फर्क कैसे किया जाए और इनका इलाज कैसे हो, उसके लिए केंद्र ने सभी राज्यों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं.

बड़ी बात ये है कि सरकार ने ये माना है कि फ्लू और डेंगू जैसी बीमारियों के साथ अगर कोरोना वायरस होता है तो डॉक्टरों के लिए इलाज एक बड़ी चुनौती होगा. डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के टेस्ट के लिए ब्लड सैंपल लिया जाए. कोरोना वायरस और स्वाइन फ्लू के टेस्ट के लिए नाक या गले से सैंपल लिया जाए.

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button