जिले को टी.बी. मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाया जा रहा विशेष मुहिम

दुर्ग : जिले को टी.बी. मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष मुहिम चलाया जा रहा है। स्लम एरिया जैसे खुर्सीपार भिलाई क्षेत्र में टी.बी. की मरीजों का चिन्हांकन कर शत्-प्रतिशत् उन्मूलन के लिए शिविर लगाया जा रहा है।

शिविर के माध्यम से लोगों को टी.बी. के बचाव और उपचार की जानकारी दी जा रही है। खुर्सीपार भिलाई के शासकीय पंडित जवाहर लाल नेहरू, हायर सेकेंडरी स्कूल में शिविर सह कार्यशाला का आयोजन किया गया

कार्यशाला में कलेक्टर अंकित आनंद ने कहा कि जिले को क्षय मुक्त जिला बनाना सर्वोच्च सामाजिक प्राथमिकता है। टी.बी. को लेकर जन मानस में अनेक भ्रांतियां बनी रहती है। कभी-कभी लोग इसे एक तरह से छूत की बीमारी समझते हैं।

सामान्य लोगों के साथ-साथ परिवार के लोग भी टी.बी. से प्रभावित मरीज से असामान्य व्यवहार करते हैं। जिससे टी.बी. से प्रभावित मरीज आहत होते हैं। उन्होंने कहा कि टी.बी. एक विशेष प्रकार के बैक्टीरिया जनित रोग है।

टी.बी. से प्रभावित मरीज के साथ सौहार्द्र व्यवहार किया जाना चाहिए। टी.बी. को एक सतत् उपचार के तहत पूर्ण रूप से ठीक किया जा सकता है। कलेक्टर आनंद ने कहा कि सामाजिक सहभागिता से लोगों में फैली भ्रांतियां और भेद-भाव को मिटाकर टी.बी. को शत्-प्रतिशत उन्मूलन कर स्वस्थ्य समाज बनाना है।

क्षय मुक्त जिला बनाने के लिए भिलाई के खुर्सीपार के मलीन बस्तियों से अभियान की शुरूआत किया जा रहा है। कार्यशाला के माध्यम से बताया गया कि टी.बी. एक बैक्टीरिया जनित रोग है। कार्यक्रम में जिला क्षय अधिकारी आर.एस. सत्यर्थी ने बताया कि टी.बी. रोग की जांच से लेकर इसके इलाज के लिए पूरी व्यवस्था है।

उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल दुर्ग, बी.एस.पी. सेक्टर 9 अस्पताल में विशेष मशीन की व्यवस्था है, जिससे बलगम की जांच की जाती है। इसके अलावा सी.एम. मेडिकल कॉलेज, शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज, नंदिनी रोड स्थित करूणा अस्पताल, बी.एम.वाय चरोदा रेलवे अस्पताल में भी जांच की सुविधा उपलब्ध है।

जिला अस्पताल सहित सभी प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में जांच की विशेष व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि लगातार खांसी आने पर बलगम की जांच करानी चाहिए। टी.बी की पुष्टि होने पर चिकित्सक की सलाह पर नियमित रूप दवाई का सेवन किया जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम नए मरीजों की तलाश के लिए मलीन बस्तियों में घर-घर दस्तक देगी। अभियान का उद्देश्य टी.बी. के प्रति लोगों में फैली भेद-भाव को मिटाना और जड़ से उन्मूलन करना है।

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