आगरा का ताजमहल – लूट सको तो लूटो

52 साल पहले 1966 में लगा था सबसे पहले ताजमहल पर 20 पैसे प्रवेश टिकट

कमाई का लगभग तीन फीसदी ही स्मारकों के सरंक्षण पर ख़र्च

आगरा के ताजमहल के दीदार करने वालों की जेब के यकीनन दिन अच्छे नहीं बल्कि बहुत ख़राब हैं।यह बात अलग है कि मोदी सरकार में अच्छे दिनों की लगातार अनब्रेकेबल धुन बजना बंद नहीं है।प्रवेश टिकट दरें आठ अगस्त से चार गुना बढ़ा दी हैं।भारतीय पर्यटकों के लिए दस रुपये के स्थान पर पथ कर मिलाकर टिकट दर पचास रुपये औऱ विदेशी पर्यटकों के लिये पथकर मिलाकर ग्यारह सौ की टिकट कर दी है।

ताजमहल में सरंक्षण के नाम पर पर्यटकों की जेब पर उस्तरा चलाना विभाग का एकमात्र मकसद प्रतीत होता है।पर्यटकों के लिये सुविधाएं देने के नाम पर हाथ खाली हैं।केंद्र सरकार के संस्कृति विभाग तथा आगरा के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग(एएसआई) का हाल यह है कि करोड़ों रुपए कमाई के बाद भी विभाग का पेट नहीं भर रहा है,डकार भी नहीं लेता।प्रवेश टिकट के रेट बढ़ा कर ताजमहल सिर्फ कमाई का जरिया बन गया है। दीदार कराने के नाम पर दोनों हाथों से लूट मची है।आगरा विकास प्राधिकरण की पथकर कैंची अलग से चलती है।

टिकट दरें बेहताशा और असमय बढ़ने और सुविधाओं का अकाल रखने से पर्यटन धंधे के भी हाथ पैर फूले ही नहीं बल्कि सूज गए हैं।परेशान हैं टूर ऑपरेटर।माना जा रहा है कि दरें बढ़ने से खासकर भारतीय पर्यटक हतोत्साहित होगा। हालांकि अभी तक हर साल करीब 8.5 लाख विदेशी और करीब 69 लाख भारतीय सैलानियों के आगरा आते हैं।

ताजमहल में सरंक्षण के विषय पर सुप्रीम कोर्ट की पैनी फटकार सुनने के बाद शायद सरकार का दिमाग टिकट दरों में मनमानी इजाफा के लिए तेजी से काम करने लगा होगा!दरें बढ़ने का यदि विरोध ज्यादा हुआ तो सरकार यह दलील दे सकती है कि ताजमहल के सौंदर्य को बचाने ,संवारने और निखारने के लिए संसाधन तो जुटाने होंगे!जब कि खबर यह है कि आगरा ताजमहल, किला समेत आगरा के सभी स्मारकों के संरक्षण पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) हर साल लगभग पांच करोड़ रुपये खर्च करता हैं, लेकिन इनके प्रवेश टिकट से ही पिछले साल एक सौ पैंसठ करोड़ करोड़ रुपये कमाए हैं। नई दरों से हर साल करोड़ो रुपये की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है।हिसाब लगाया जाए तो ताज़महल और किला सहित 8 स्मारकों से हुई कमाई का लगभग तीन फीसदी ही स्मारकों के सरंक्षण पर खर्च हुआ।इतने ख़र्च के बाद भी हाल खराब हैं, पर्यटकों के लिये सुविधा जीरो है।

संस्कृति मंत्रालय ने बुधवार सुबह से देश के 17 स्मारकों में प्रवेश टिकट की दर बढ़ा दी है, सबसे ज्यादा असर ताजमहल आने वाले भारतीय और विदेशी सैलानियों पर पड़ेगा। विदेशी ताज का दीदार 1100 रुपये, भारतीय 50 रुपये और सार्क, बिस्सटेक देशों के सैलानी 540 रुपये में कर पाएंगे ताजमहल का दीदार।

जानकार बताते हैं कि ताजमहल के दर्शन के लिए करीब बावन वर्ष पहले प्रवेश टिकट पहली बार 20 पैसे लगाया गया था। तीन साल बाद 1969 में इसे 50 पैसे कर दिया गया। ताज से कमाइ होते देख 1976 में एडीए ने पथकर लगा दिया। तब एडीए तीन गुना ज्यादा 1.50 रुपये पथकर लेता था। इस तरह दो रुपये का टिकट लगने लगा। 1993 में सुबह 6 से 8 और शाम को 5 से 7 बजे के बीच 100 रुपये का टिकट लगाया गया है। 1995 में एडीए ने अपनी टिकट 10 रुपये की कर दी। एडीए की देखादेखी एएसआई ने 1996 में 50 पैसे की जगह 5 रुपये की टिकट कर दी और पर्यटक साढ़े दस की जगह 15 रुपये देने लगे।

जनवरी 2000 से ताज में देशी, विदेशी पर्यटकों की टिकट दरें अलग अलग कर विदेशियों के लिए 500 रुपये पथकर बसूली शुरू आरम्भ हुई।एएसआई ने तब टिकट बढ़ाकर 470 रुपये किया। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई और इसके बाद एएसआई ने टिकट 250 रुपये कर दिया। तब से 1 अप्रैल, 2016 तक ताज पर 750 रुपये का टिकट वसूला गया। केंद्रीय संस्कृति मंत्री डा. महेश शर्मा ने कई बार ताज की टिकट दर कम करने की घोषणा की थी,लेकिन कथनी और करनी में फर्क को सही ठहराते हुए एक अप्रैल 2016 को ताज समेत स्मारकों में भारतीय को टिकट दस की जगह 30 रुयये और विदेशी सैलानियों का टिकट 250 की जगह 500 कर दिया गया। 15 सितंबर, 2015 को इसकी अधिसूचना जारी की गई, लेकिन पर्यटन संस्थाओं मुख़ालफ़त के कारण इसे टालकर एक अप्रैल, 2016 कर दिया गया। अब 8 अगस्त को फिर प्रवेश टिकट में इजाफा का चाबुक चला दिया।गया है। हालांकि इस बार ऐसे स्मारक चुने गए, जहां सबसे ज्यादा विदेशी सैलानी आते हैं।

एसआई महानिदेशक ऊषा शर्मा ने एक अगस्त को स्मारकों की प्रवेश टिकट दर बढ़ाने की अधिसूचना जारी की थी,जिसे बुधवार 8 अगस्त के सूर्योदय से लागू कर दिया। वर्ल्ड हेरिटेज श्रेणी के छह और बी श्रेणी के 11 स्मारकों का दीदार बुधवार सुबह से महंगा हो चुका है। आगरा में वर्ल्ड हेरिटेज स्मारक तीन और बी श्रेणी के पांच स्मारक पांच हैं।

क्या कहते हैं आगरा के टूर ऑपरेटर और होटल संगठन?

सरकार के फैसले की तुग़लकी फरमान मानते हुए टूरिज्म गिल्ड के महासचिव राजीव सक्सेना कहते हैं कि सरकार ने तो अदूरदर्शिता का परिचय देते हुए टिकट दरें बढ़ा दीं, जब कि टूर ऑपरेटर वर्ष 2019 के पैकेज बेच रहे हैं। यह नुकसान टूर आपरेटरों को वहन करना पड़ेगा।दुनिया भर के सैलानी भारत में घट रही कई घटनाओं के कारण किनारा कर रहे हैं। इसलिए दरें बढ़ाने के स्थान पर कम करनी चाहिये।

 

आगरा टूरिस्ट डेवलपमेंट फाउंडेशन के अध्यक्ष से संदीप अरोरा का मानना है कि आगरा अब महंगा डेस्टिनेशन हो गया है, जिससे पर्यटक अन्य स्थलों का रुख कर रहे हैं। एएसआई ने तो ताजमहल को सोने का अंडा देने वाली मुर्गी मान लिया है।दरें जम्प कर गईं,परंतु पर्यटकों के लिए सुविधा नहीं है। टिकट की कीमत कई गुना ज्यादा वसूली जा रही है।</>

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