छत्तीसगढ़

आचार संहिता लगते ही मंत्री को याद आने लगे शिक्षाकर्मी: शेषराज हरबंस

सरकार आने पर बचे खुचे शिक्षाकर्मियों का भी संविलियन किया जाएगा

रायपुर :

शेषराज हरबंस प्रदेश उपाध्यक्ष छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष महिला कांग्रेस जांजगीर ने कहा कि 15 वर्षों से लगातार सत्ता में रहने के बावजूद शिक्षाकर्मियों के दुख-दर्द को न समझ पाने वाले और वर्तमान में स्कूल शिक्षामंत्री केदार कश्यप को प्रदेश में चुनाव की तिथि का ऐलान होते ही और आचार संहिता लगते ही शिक्षाकर्मियों की याद आने लगी है।

खासतौर पर उन शिक्षाकर्मियों की जो संविलियन से वंचित रह गए हैं और मंत्री ने कल प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह घोषणा कर दी की सरकार आने पर बचे खुचे शिक्षाकर्मियों का भी संविलियन किया जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि मंत्री आपके पास सुनहरा मौका था की मध्यप्रदेश की तर्ज पर यहां पर भी प्रदेश के सभी शिक्षाकर्मियों का संविलियन किया जाता लेकिन 8 वर्ष का बंधन लगाकर आपने अपने ही भाई-बहनों को संविलियन से वंचित कर दिया और एक भी बार आप ने यह नहीं सोचा कि उनके ऊपर क्या गुजरेगी।

संविलियन तो दूर आपने उनके लिए अंतरिम राहत देने तक की जहमत नहीं उठाई और आज आपको वही शिक्षाकर्मी भाई बहन याद आने लगे क्योंकि चुनाव करीब है इसलिए अब आपको आचार संहिता का भी ध्यान नहीं रहा ।

उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री रहते हुए आपने शिक्षाकर्मी वर्ग 3 की वेतन विसंगति की ओर कभी भी ध्यान नहीं दिया, जिसके कारण प्रदेश के शिक्षाकर्मी संविलियन की घोषणा होने के बाद भी सड़क पर आने को मजबूर हुए और राजधानीमें आचार संहिता लगने से 1 सप्ताह पहले तक प्रदर्शन करते नजर आए ।

आपने अपने कार्यकाल और अपने सत्ता में रहते हुए यदि इस विषय को गंभीरता से लिया होता तो आज यह स्थिति निर्मित नहीं होती कि आपको फिर कोई वादा करना पड़ता।

शिक्षक समुदाय पुरातन काल से समाज और सरकार को दिशा दिखाते हुए आया है और उनकी भूमिका राष्ट्र और राज्य निर्माण में सदा सर्वोपरि रही है प्रदेश का यह प्रबुद्ध वर्ग आपकी भाषा भी समझ रहा है और आपकी नियत भी….. और उसे बीते 5 वर्ष के दौरान आपकी भूमिका का भी एहसास होगा ऐसा मुझे लगता है….. काश आप ने अपनी भूमिका का सही तरीके से निर्वहन किया होता तो आज यह स्थिति नहीं आती ।

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