झूठे अनुबंध से ले रहे हैं निजी विद्यालय के लिए अनुमति

धनेश्वर साहू

जैजैपुर।

नवयुग पब्लिक स्कूल चिस्दा में यह देखा गया कि इस विद्यालय में 73 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। जिसमें 8 शिक्षकों के द्वारा यह नवयुग पब्लिक स्कूल चलाया जा रहा है। जिसमें शिक्षक के अनुपात में जो गुणवता होना चाहिए वह छात्रों में गुणवत्ता विहीन दिखाई दिया।

जिसमें यह देखा गया की वहां पर खेल का मैदान का भाव बच्चों के लिए शौचालय का ना होना। जो शौचालय बना है। उसमें कूड़ा करकट गंदगी से जाम एवं छत विहीन शौचालय मात्र एक है।

वहीं पर नर्सरी से लेकर आठवीं तक के बच्चों के लिए विद्युत की व्यवस्था नहीं है जिनके कारण उन्हें पानी का समस्या का सामना करना पड़ता है।

विद्यालय के ठीक पीछे में तालाब है लेकिन विद्यालय में छात्रों के रक्षा के लिए किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं है, घेराबंदी विद्यालय का ना होने के कारण कभी भी अप्रिय घटना घट सकती है ।और यह विद्यालय को नाममात्र का खंड _ खंड करके विद्यालय का संचालन किया जा रहा है।

जब हमारे प्रतिनिधि ने वहां के आचार्य महोदय को उनका नाम जानना चाहा तो उन्होंने अपना नाम बताने से भी इंकार कर दी यह देखा जाए तो शिक्षक तो अधिक है लेकिन वहां पर पढ़ाई का स्तर नहीं के बराबर है।

जिनसे उन छात्रों के भविष्य के साथ यह नवयुग पब्लिक स्कूल चिस्दा खिलवाड़ कर रही है। शासन से जब विद्यालय का अनुमति लिया जाता है उस समय विद्यालय के संचालक के द्वारा जो शपथ पत्र दिया जाता है वह केवल झूठा शपथ पत्र दिया जाता है।

यदि अनुमति देते समय शिक्षा विभाग के आला अफसर उस जगह का निरीक्षण करें तो यह पाएंगे कि यह विद्यालय विद्यालय के लायक नहीं है क्योंकि खेल का मैदान का अभाव पानी की समस्या कमरे की समस्या तथा अनेकों प्रकार की समस्या से ग्रसित रहता है।

लेकिन जो अधिकारी विद्यालय संचालन के लिए अनुमति देते हैं वह अपना पाकिट गर्म करके अनुमति देते हैं। जिनकी वजह से हर गांव में कुकुरमुत्ता की तरह विद्यालय का संचालन हो रहा है ।यदि अधिकारी सही रूप से विद्यालय का मान्यता के लिए अनुमति देते हैं तो बहुत ही कम विद्यालय का संचालन होगा और सही रूप से होगा लेकिन अधिकारियों का जेब गर्म नहीं होगा।

इसलिए आंख मूंदकर वह निजी विद्यालय में हस्ताक्षर करके चलाते हैं जिनकी वजह से बच्चों को अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ करना पड़ रहा है।जो अधिकारी लोगों को ध्यान देना चाहिए कि विद्यालय संचालन के पहले घटनास्थल का निरीक्षण करें यदि सही मात्रा में वहां निरीक्षण में पाए जाते हैं तो विद्यालय चलाने की अनुमति दें। नहीं तो यह विद्यालय और छात्रों का भविष्य के साथ में अधिकारी एवं विद्यालय संचालन के द्वारा खिलवाड़ किया जाता रहेगा।

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