तूतीकोरिन हिंसा पर बोले सीएम – प्लांट बंद करने पर हो रहा विचार

चेन्नई : सीएम के पलानीस्वामी ने गुरुवार को चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि राज्य सरकार स्टरलाइट कंपनी का प्लांट बंद करने के लिए सभी उपायों पर विचार कर रही है। इसके लिए कानूनी विशेषज्ञों से राय भी ली जा रही है। उन्होंने कहा कि इस कंपनी के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन चल रहा था और अब विपक्ष ने इसे हिंसक रूप दे दिया। प्लांट बंद करने की कार्यवाही जयललिता के कार्यकाल से चल रही है। मामला अदालत में लंबित है।

उधर, विपक्ष ने शुक्रवार को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है। द्रमुक नेता कनीमोरी ने कहा कि तमिलनाडु सरकार को दिशा निर्देश मोदी सरकार दे रही है। स्टरलाइट कंपनी इसी वजह से चल रही है, क्योंकि इसे केंद्र व राज्य दोनों सरकारों का समर्थन मिल रहा है। उनका कहना था कि जांच होनी चाहिए कि पुलिस फायरिंग का आदेश किसने दिया था? केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सारे मामले पर राज्य सरकार से रिपोर्ट के साथ उन कदमों का ब्यौरा भी मांगा है जो हिंसाग्रस्त इलाकों में उठाए गए।

तूतीकोरिन में पुलिस की गोली से मरने वालों की तादाद 13 हो गई है। मृतकों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस ने लगभग सौ लोगों को गिरफ्तार करने के साथ स्टालिन, कमल हासन और वाइको को भी नामजद किया। आरोप है कि इन नेताओं ने कानून को धता बताकर लोगों से मुलाकात की।

मंगलवार और बुधवार को हुई हिंसा के बाद भी तूतीकोरिन में आम जनजीवन सामान्य नहीं हो सका है। गुरुवार को न तो बसें चलीं और न ही ऑटो। लोग अपने घरों में ही सिमटे रहे। पुलिस टीम एहतियात के तौर पर गश्त करती रहीं। अभी भी शहर में धारा 144 लागू है। चार या इससे ज्यादा लोग एक जगह पर एकत्र नहीं हो सकते। शहर में हिंसा की वारदातें आज भी छिटपुट हुईं। शराब के ठेके को नुकसान पहुंचाया गया। लोग प्लांट को बंद करने के लिए नारेबाजी कर रहे थे।

स्टालिन ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में फोर्ट सेंट जार्ज स्थित राज्य सचिवालय पर धरना भी दिया। पुलिस ने उन्हें वहां से उठाया तो वह उसके सामने जाकर बैठ गए। उनके साथ पार्टी विधायक भी थे। स्टालिन का कहना है कि केवल जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक के तबादले करके सरकार अपना पल्ला नहीं झाड़ सकती। उन्होंने सीएम के त्यागपत्र के साथ डीजीपी टीके राजेंद्रन को तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग की। द्रमुक व कांग्रेस ने विधानसभा में होने वाली बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में शामिल न होने का फैसला लिया। मीटिंग से बाहर आने से पहले स्टालिन ने कहा कि सीएम को लोगों की चिंता नहीं है। उनकी मांग थी कि मामले की जांच हाई कोर्ट के मौजूदा जज करें।

वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने वीडियो संदेश के जरिये लोगों की मौत पर दुख जताते हुए कहा कि लोग चाहेंगे तभी कंपनी काम करेगी। ट्विटर पर डाले गए वीडियो में उनका कहना था कि अभी कंपनी अदालत व सरकार से मंजूरी का इंतजार कर रही है। जो भी आदेश होंगे कंपनी पूरी तरह से पालना करेगी।

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