स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत राजधानी को मुक्कड़ मुक्त बनाने का टारगेट शुरू

मुक्कड़ के आसपास की दीवारों में भी बनाई जाएगी कलाकृतियां

रायपुर: राजधानी में मुक्कड़ वाली जगह पर सीमेंट-रेती की पक्की घेरेबंदी कर बीचोबीच में मिट्‌टी भरकर वहां घास और पौधे उगाए जाएंगे। मुक्कड़ों की जगह हरी-हरी घास उगाई जाएगी। शहर भर में कहीं भी कचरा फेंक देने वाली आदत छुड़ाने मुक्कड़ों को हटाया जा रहा।

मुक्कड़ के आसपास की दीवारों में कलाकृतियां भी बनाई जाएगी। अफसरों ने बताया कि फिलहाल 20 मुक्कड़ पर एक साथ काम चालू कर दिया गया है। इनमें अंबेडकर अस्पताल, जिला कोर्ट, कमिश्नर ऑफिस, मल्टीलेवल पार्किंग, काशवाणी चौक, बूढ़ापारा, पेंशनबाड़ा, मौदहापारा जैसे इलाके हैं, जहां लोगों की आदत की वजह से मुक्कड़ बन गए थे। चूंकि ये जगह खाली थी, इस वजह से किसी कोई दिक्कत नहीं थी।

स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत राजधानी को मुक्कड़ मुक्त बनाने का टारगेट तय किया गया है। पूरा काम उसी लक्ष्य के तहत किया जा रहा है। पचास जगहों को संवारने में 20 लाख से ज्यादा खर्च होने का अनुमान है। इसका प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है।

डस्टबिन और मुक्कड़ फ्री :

स्वच्छता सर्वेक्षण की थीम डस्टबिन फ्री सिटी है। मुक्कड़ खत्म करने के साथ सार्वजनिक इलाकों से डस्टबिन हटाने का काम भी चल रहा है। मुक्कड़ वाली जगहों को सौंदर्यीकरण करने के बाद जालीदार फेंसिंग के जरिए एक नया लुक भी देंगे। ताकि कोई भी दोबारा इन जगहों पर कचरा न फेंके। 20 जगहों पर अगर ये प्रयोग सफल रहा तो बाकी जगहों पर अलग अलग थीम पर इसे बनाया जाएगा।

मुक्कड़ खत्म करने के बाद जो खाली जगह है उसके बेहतर उपयोग के लिए स्मार्ट सिटी ने ये योजना बनाई है। ताकि शहर भी सुंदर दिखे और लोगों को आने जाने में बदबू की वजह से परेशानी न उठाना पड़े। कृति शर्मा, प्रोजेक्ट इंचार्ज, स्मार्ट सिटी

जहां बड़ी जगह वहां मार्केट, पार्किंग :

ऐसे मुक्कड़ जो आकार में बहुत ज्यादा बड़े हैं। उसकी खाली जगह का इस्तेमाल बाजार बनाने में करना तय किया गया है। ऐसी जगहों पर आकार के मुताबिक औसतन दस से बीस छोटी दुकानों वाले बाजार बना जाएंगे।

यही नहीं संबंधित इलाके की जरूरत के हिसाब से भी जगह का उपयोग किया जाएगा। कुछ जगहों पर फूल पौधे और पार्किंग का भी प्लान है।जबकि जहां ज्यादा जगह की गुंजाइश है वहां साइकिल डॉक या स्टैंड भी बनेंगे।

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