पॉर्न फिल्मों में काम छोड़ने से इनकार करने पर टीचर ने नौकरी गंवाई

एक क्रिस्चन स्कूल में पढ़ाने वाली शिक्षिका को पॉर्न फिल्मों में पार्ट टाइम काम करने के कारण अपनी नौकरी गंवानी पड़ी। नीना स्काइ नाम की इस टीचर से जब स्कूल ने पॉर्न इंडस्ट्री छोड़ने को कहा, तो नीना ने इससे इनकार करते हुए कहा कि उन्हें बच्चों को पढ़ाना और सेक्स करना, दोनों बहुत पसंद है। नीना का कहना है कि सेक्स करने की नौकरी करना उनके लिए किसी सपने जैसा था। नीना ने स्कूल को दो-टूक जवाब देते हुए कहा कि वह पॉर्न इंडस्ट्री छोड़ने को तैयार नहीं हैं।

स्कूल को जब नीना के पॉर्न फिल्मों में काम करने की बात पता चली, तो उन्होंने सीधे नीना से बात की। नीना द्वारा यह काम छोड़ने से इनकार करने पर स्कूल ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया। नीना का कहना है कि वह बहुत अच्छी शिक्षिका थीं। सेक्स को अपना शौक बताने वाली नीना का कहना है कि पॉर्न फिल्मों में काम करने की वजह से उन्हें स्कूल से नहीं निकाला जाना चाहिए था। जिस स्कूल में नीना पढ़ाती थीं, उसके बाकी शिक्षकों का मानना था कि नीना का पार्ट टाइम पेशा उन धार्मिक मूल्यों के खिलाफ है जिनकी सीख स्कूल अपने छात्रों को देता है।

नीना ने स्कूल से साफ कह दिया कि उन्हें बच्चों को पढ़ाना और सेक्स करना, दोनों बहुत पसंद है…

फॉक्स न्यूज से बात करते हुए नीना ने कहा, ‘स्कूल के मुताबिक, मेरा पॉर्न फिल्मों में काम करना उनकी शिक्षाओं के खिलाफ है। स्कूल तो शादी से पहले सेक्स करने के भी खिलाफ हैं। स्कूल प्रशासन का कहना था कि नौकरी लेते समय मैंने जिन पेपर्स पर साइन किया था, यह उसके खिलाफ है।’ नीना ने बताया, ‘स्कूल नहीं चाहता था कि मैं पॉर्न फिल्मों में काम करूं। उसने मुझे इस इंडस्ट्री को छोड़ने के लिए मनाने की कोशिश की। उन्होंने मेरी मदद करने और मुझे सलाह-मशविरा देने का भी प्रस्ताव दिया, लेकिन मैं तैयार नहीं हुई। मैं पॉर्न इंडस्ट्री से बाहर जाना ही नहीं चाहती।’ वह कहती हैं, ‘मुझे पढ़ाना भी अच्छा लगता है और सेक्स करना भी पसंद है। अगर मैं दोनों काम करना जारी रख सकती हूं, तो मैं ऐसा करूंगी।’ नीना बताती हैं कि उन्हें उनके पहले दृश्य के लिए हाथोहाथ डेढ़ लाख रुपये मिल गए थे।

उन्होंने आगे बताया, ‘मेरे पास जिंदगी में कभी इतना पैसा नहीं रहा। कभी इससे पहले एकसाथ मुझे इतने पैसे नहीं मिले थे। पॉर्न इंडस्ट्री को समाज शर्मिंदगी की तरह देखता है, लेकिन मैं ऐसा नहीं सोचती। मैं खुले विचारों की हूं। मैं दूसरों के बारे में राय नहीं बनाती हूं।’

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