छत्तीसगढ़

नवकार पब्लिक के शिक्षकों को न तो सैलरी मिल रही है और ना ही जॉब

अभनपुर के गोबरा नवापारा नगर के अधिकांश निजी स्कूलो मे मनमानी का दौर चल रहा

अभनपुर: अभनपुर के गोबरा नवापारा नगर के अधिकांश निजी स्कूलो मे मनमानी का दौर चल रहा है, कही स्कूल मे फीस वृद्धि के चलते पालक परेशान है, तो कही शिक्षकों को संचालक द्वारा काम से बाहर करने और आधी सैलेरी प्रदान कर कटौती करने का मामला सामने आ रहा है.

आलम ऐसा है की हरेक पक्ष शिक्षा विभाग के मंत्री से लेकर जिम्मेदार अधिकारी तक न्याय की गुहार लगा रहा है, लेकिन ज्ञापन रखकर केवल खानापूर्ति करने की विभागीय कार्यवाही जारी है. और कार्यवाही शून्य नजर आ रही है.

यही कारण है की नगर के निजी स्कूल संचालक के हौसले बुलंद है, और वे जमकर मनमानी कर रहे है. हाल ही मे एक ताज़ा मामला नगर के रज़ा कॉलोनी स्थित नवकार पब्लिक स्कूल का आया है, जहाँ संचालक द्वारा मनमानी करते हुए स्कूल के सभी शिक्षकों को पिछले कई महीनों से ना तो सैलेरी प्रदान की जा रही है और नहीं उन्हें काम पर वापस रखा जा रहा है जिससे उनका जीवन यापन करना दूभर होता जा रहा है.

पेशे से शिक्षक रहे यह सभी कोरोना के इस दौर मे दुसरी जगह जॉब के लिए भटक रहे है, कोरोना के चलते अभी दुसरी जगह काम मिलना भी मुश्किल है. ऐसे मे जब सरकार ने स्पष्ट आदेशा दिया है की कोई भी स्कूल अपने स्टाफ को बाहर नहीं करेगा तो नवकार पब्लिक स्कूल की मनमानी पर रोक लगाने के लिए विभागीय अधिकारी मौन क्यों है यह समझ से परे है.

संस्था के शिक्षक रमेश सिंह राजपूत, राजेश सिंह, ओमप्रकाश साहू, रौशनी देवांगन, पायल देवांगन, टिकेश्वरी साहू, दीक्षा गुप्ता, पवन तारक , वीरेंद्र साहू, डाकेश्वर साहू, मोनिका कंसारी आदि ने बताया की वर्तमान मे स्कूल संचालक द्वारा उन सभी को स्कूल की ऑनलाइन क्लासेस नहीं लेने दी जा रही है और उसकी जगह बाहर के शिक्षक क्लास ले रहे है, जिससे वे सभी बेरोजगार हो गए.

वही उनकी सैलेरी भी पिछले कई महीनों से लंबित पड़ी है. शिक्षको ने बताया की ऑनलाइन क्लास प्रारम्भ करने के लिए हमने जब संस्था संचालक से इस मामले पर चर्चा की तो उन्होने पूरी सैलेरी ना देकर सिर्फ 30% सैलरी देने की बात कही, जिस पर हम सभी ने असमर्थता जताते हुए इतने मे काम करने से मना करते हुए 50 प्रतिशत राशि देने की मांग की क्योंकि यहाँ पर काम के हिसाब से कोई अच्छी सैलरी भी नहीं मिलती है.

मामले की सुलह के लिए कई बार संचालक महोदय से चर्चा करनी चाही, लेकिन उन्होंने हमारी एक ना सुनी. जिसके बाद हम सभी ने फैसला कर इस मामले को विकासखंड शिक्षाधिकारी, जिला शिक्षाधिकारी, अनुविभागीय अधिकारी, जिलाधीश आदि को पत्र लिखा और कार्यवाही कर न्याय दिलाने के लिए ज्ञापन सौंपा. लेकिन आज महीनों बीत चुके है किसी भी जिम्मेदार अधिकारियो ने हमारी सुध तक नहीं ली. जिससे हम सभी काफ़ी छुब्ध है, और हमारी माली हालत दिन ब दिन बदतर होती जा रही है.

अभी सोमवार को ही हमने पालको को स्कूल बुलाया और स्कूल संचालक से बातचीत करना चाहा, हम सभी ने उनके समक्ष 50 % प्रतिशत सैलेरी व पिछले सैलेरी की भुगतान के साथ जल्द से जल्द जॉब मे वापसी की मांग की है, जहाँ भी उन्होने काम मे रखने न रखने को गोलमोल जवाब दिया व सैलरी को लेकर कुछ भी बोलने से मना कर दिया. ऐसे मे अब हम सभी शिक्षक बहुत जल्द पालको को साथ मे लेकर हल्ला बोलेंगे.

वही अपनी समस्या को लेकर पहुंचे पालको ने भी स्कूल के शिक्षकों को वापस रखने की मांग की ऐसे ही पालक भानुप्रताप बंदे व प्रियेश प्रजापति ने बताया की इन्ही शिक्षकों के मार्गदर्शन मे उनकी यहाँ के बच्चों ने दसवीं बोर्ड परीक्षा मे जबरदस्त सफलता हासिल की थी, और अच्छे से पढ़ाई कर रहे है और अब इस विकट स्थिति मे उन्ही शिक्षकों के साथ मैनेजमेंट का ऐसा व्यवहार काफ़ी अनुचित है.

शिक्षकों पर पड़ रहा बुरा असर

ज्ञात हो की इस कोरोना संक्रमण का सबसे ज्यादा असर निजी शिक्षा विभाग के शिक्षको पर हुआ है, आज नगर के अधिकांश निजी विद्यालय अपने स्कूल से शिक्षकों की छंटनी किये है, और उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया. महामारी के इस दौर मे किसी भी प्रकार की समाधान के लिए कोई भी पक्ष नहीं मान रहा है. जिससे इसका नुकसान शिक्षकों हो रहा है. वह शिक्षक जो राष्ट्र के भावी पीढ़ियों को अपने ज्ञान कौशल बुद्धि से सींचता है आज उसकी हालत स्कूल संचालको के मनमाने रवैये से बदतर होते जा रही है लेकिन किसी को इससे कोई लेना देना नहीं है, जिससे शिक्षको को काफ़ी ठेस पहुंचा है. नवकार पब्लिक स्कूल के शिक्षको ने बताया की वे सभी शिक्षण को एक नॉवेल प्रोफेशन समझकर कुछ अच्छा करने आये थे लेकिन ऐसी स्थिति मे निजी स्कूलो की शिक्षक की हालत देखकर लगता है की निजी स्कूलों मे शिक्षक बनना ही नहीं चाहेगा.

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