टेलीकॉम सेक्टर : बड़े सुधारों के लिए केंद्र सरकार ने कसी कमर

रोजगार सृजन सहित अन्य फैसलों से विकास को मिलेगी मजबूती

केंद्र सरकार ने हाल ही में दूरसंचार क्षेत्र को राहत देने के लिए अहम फैसले लिए हैं। इन फैसलों के क्या मायने हैं और इनका उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा, यह जानना बेहद जरूरी है। दरअसल, भारत सरकार के अधीन कार्य करने वाला दूरसंचार विभाग इस क्षेत्र से जुड़ी सारी गतिविधियों का संचालन करता है। दूरसंचार विभाग कई तरह के काम करता है, जिनमें दूरसंचार क्षेत्र पर नजर रखने से लेकर लाइसेंस देने तक जैसे कई जरूरी कार्य शामिल होते हैं। फिलहाल दूरसंचार सेवाओं की तेजी से वृद्धि के लिए विकास संबंधी नीतियां बनाई जा रही है और केंद्र सरकार द्वारा उन्हें लागू भी किया जा रहा है। ऐसे में सरकार द्वारा इस क्षेत्र में किए गए ताजा बदलावों के बारे में विस्तार से जानना आवश्यक है।

क्या काम करता है दूरसंचार विभाग ?

बताना चाहेंगे कि यूनीफाइड एक्सेस सर्विस इंटरनेट और वीसेट सर्विस जैसी विभिन्न दूरसंचार सेवाओं को लाइसेंस प्रदान करने की जिम्मेदारी दूरसंचार विभाग की ही होती है। इसके अलावा दूरसंचार विभाग अंतरराष्ट्रीय निकायों से घनिष्ठ संबंध स्थापित कर रेडियो संचार के क्षेत्र में फ्रीक्वेंसी प्रबंधन की जिम्मेदारी, अवैध कार्यकलापों को रोकना, दूरसंचार नेटवर्कों के अवैध कार्यों और अवैध प्रचालन पर नियंत्रण करने संबंधी कार्य करता है।

वहीं मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी से जुड़े मुद्दे सुलझाना और यह पता लगाने के उद्देश्य के साथ कि क्या मोबाइल सेवा प्रचालक कनेक्शन उपलब्ध कराने से पहले उपभोक्ता सत्यापन के लिए दूरसंचार विभाग के दिशा-निर्देशों का अनुपालन कर रहे हैं या नहीं, वैश्विक कॉलिंग कार्ड, इंटरनेशनल सिम कार्ड इत्यादि बेचने के लिए अनापत्ति संबंधी मामले देखना, लाइसेंस दाता द्वारा जारी लाइसेंस शर्तों और जनहित में जारी किए गए दिशानिर्देशों के संबंध में लाइसेंस धारक द्वारा सेवा अनुपालन की जांच करना जैसे कई जरूरी जिम्मेदारियां संभालना इसी विभाग का काम है। दूरसंचार विभाग की कोशिश सस्ती दरों पर दूर-दराज के गांवों तक टेलीफोन सेवा को पहुंचाना हैं। दूरसंचार नेटवर्कों के अवैध कार्यों पर भी लगाम लगाने का कार्य इसी विभाग के अंतर्गत आता है।

दूरसंचार क्षेत्र में किए गए प्रमुख सुधार

वर्तमान में दूरसंचार क्षेत्र में सुधार का बीड़ा केंद्रीय संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव के कंधों पर है। उन्होंने बीती 15 सितंबर को इस क्षेत्र में ताजा सुधारों के संबंध में अहम जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दूरसंचार क्षेत्र में स्वत: मार्ग के माध्यम से 100% एफडीआई यानि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को अनुमति देने का फैसला किया है। उन्होंने यह भी बताया कि इसमें सभी सुरक्षा उपाय लागू होंगे। दरअसल, केंद्र के इस कदम से टेलीकॉम कंपनियों को पूंजी की तरलता बढ़ाने और नियमों के पालन के बोझ को कम करने में मदद मिलेगी। दूसरा, इन सुधारों से टेलीकॉम सेक्टर में निवेश को भी खासा प्रोत्साहन मिलेगा। वहीं यह भी उम्मीद की जा रही है कि भारी कर्ज के बोझ के तले दबे टेलीकॉम सेक्टर को सरकार के इस पैकेज से काफी राहत मिलेगी।

टेलीकॉम सेक्टर में किए गए 9 ढांचागत सुधार व 5 प्रक्रिया सुधार :

ढांचागत सुधार-

  1. एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) का युक्तिकरण: गैर-टेलीकॉम राजस्व को एजीआर की परिभाषा से भावी आधार पर बाहर रखा जाएगा।
  2. बैंक गारंटी (BG) को युक्तिसंगत बनाया गया: लाइसेंस शुल्क और अन्य समान करारोपण के एवज में बैंक गारंटी आवश्यकताओं (80%) में भारी कमी की गई है। देश में विभिन्न लाइसेंस सेवा क्षेत्रों में अनेक बैंक गारंटी की अब कोई आवश्यकता नहीं है। इसके बजाए एक ही बैंक गारंटी पर्याप्त होगा।
  3. ब्याज दरों को युक्तिसंगत बनाया गया व दंड हटाया गया: 1 अक्टूबर, 2021 से, लाइसेंस शुल्क व स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क (SUC) के विलंबित भुगतान पर ब्याज की दर एसबीआई एमसीएलआर+4% के बजाय एमसीएलआर+2% होगी। ब्याज को मासिक के बजाय सालाना संयोजित किया जाएगा। जुर्माना और जुर्माने पर ब्याज को हटा दिया जाएगा।
  4. अब से आयोजित नीलामी में किश्त भुगतान को सुरक्षित करने के लिए किसी भी बैंक गारंटी की आवश्यकता नहीं होगी। टेलीकॉम उद्योग परिपक्व हो गया है और पहले की परिपाटी की तरह बैंक गारंटी की अब कोई आवश्यकता नहीं है।

  5. स्पेक्ट्रम अवधि: भविष्य की नीलामी में स्पेक्ट्रम की अवधि 20 से बढ़ाकर 30 वर्ष कर दी गई है।

  6. भविष्य की नीलामी में प्राप्त स्पेक्ट्रम के लिए 10 वर्षों के बाद स्पेक्ट्रम के सरेंडर की अनुमति दी जाएगी।
  7. भविष्य की नीलामी में प्राप्त स्पेक्ट्रम के लिए कोई स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क नहीं होगा।
  8. स्पेक्ट्रम साझेदारी को प्रोत्साहित किया गया-स्पेक्ट्रम साझेदारी के लिए 0.5% का अतिरिक्त SUC हटा दिया गया है।
  9. निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए टेलीकॉम सेक्टर में स्वत: मार्ग के तहत 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी गई है। सभी सुरक्षा उपाय लागू होंगे।

प्रक्रिया सुधार-

  1. नीलामी कैलेंडर नियत- स्पेक्ट्रम नीलामी सामान्यतः प्रत्येक वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही में आयोजित की जाएगी।
  2. व्यापार सुगमता को बढ़ावा दिया गया- वायरलेस उपकरण के आयात के लिए 1953 के कस्टम्स नोटिफिकेशन के तहत लाइसेंस की कठिन आवश्यकता को हटा दिया गया है। इसे सेल्फ-डिक्लेयरेशन से प्रतिस्थापित किया जाएगा।
  3. केवाईसी सुधार: सेल्फ-केवाईसी (APP Based) की अनुमति दी गई है। ई-केवाईसी की दर को संशोधित कर केवल एक रुपया कर दिया गया है। प्री-पेड से पोस्ट-पेड और पोस्ट-पेड से प्री-पेड में स्थानांतरण के लिए नए केवाईसी की आवश्यकता नहीं होगी।
  4. नए कस्टमर बनाए जाने के समय भरे जाने वाले फॉर्म को डेटा के डिजिटल स्टोरेज से बदल दिया जाएगा। इससे टेलीकॉम कंपनियों के विभिन्न गोदामों में पड़े लगभग 300-400 करोड़ कागजी फॉर्म की आवश्यकता नहीं रहेगी।
  5. टेलीकॉम टावरों की स्थापना के लिए दी जाने वाली मंजूरी की प्रक्रिया को सरल कर दिया गया है। दूरसंचार विभाग का पोर्टल अब सेल्फ-डिक्लेयरेशन के आधार पर आवेदन स्वीकार करेगा। अन्य एजेंसियों के पोर्टल (जैसे नागरिक उड्डयन) को दूरसंचार विभाग के पोर्टल से जोड़ा जाएगा।

टेलीकॉम कंपनियों की पूंजी की तरलता संबंधी आवश्यकताओं के लिए राहत उपाय:

कैबिनेट ने सभी टेलीकॉम कंपनियों के लिए निम्नलिखित को मंजूरी दी:

– एजीआर के फैसले से उत्पन्न होने वाले देय राशि के वार्षिक भुगतान में चार साल तक की मोहलत/ ढील, हालांकि, ढील दी गई देय राशियों को राशियों के नेट प्रेजेंट वैल्यू की रक्षा करके संरक्षित किया जा रहा है।
– पिछली नीलामियों (2021 की नीलामी को छोड़कर) में खरीदे गए स्पेक्ट्रम के देय भुगतान पर चार साल तक की मोहलत/ ढील। देय भुगतान के नेट प्रेजेंट वैल्यू को संगत नीलामी में निर्धारित ब्याज दर पर संरक्षित किया जाएगा।
– टेलीकॉम कंपनियों को भुगतान में उक्त ढील के कारण उत्पन्न होने वाली ब्याज राशि को इक्विटी के माध्यम से भुगतान करने का विकल्प दिया जाएगा।
– मोहलत/ ढील अवधि के अंत में उक्त ढील दिए गए भुगतान से संबंधित देय राशि को सरकार के विकल्प पर इक्विटी में परिवर्तित किया जा सकेगा जिसके लिए वित्त मंत्रालय द्वारा दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

100 फीसदी FDI को मंजूरी

केंद्र सरकार ने देश में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए टेलीकॉम सेक्टर में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी है। इसके अंतर्गत सभी सुरक्षा उपाय लागू होंगे। सरकार के इस कदम से सेवा प्रदाता कंपनियों को अपनी आर्थिक सेहत सुधारने का मौका मिलेगा।

उपभोक्ताओं के हितों के साथ रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद

टेलीकॉम सेक्टर के ये सुधार रोजगार, विकास, प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता हितों को प्रोत्साहित करेंगे। इससे अब मोबाइल बिल बढ़ने की आशंका भी कम होगी। वहीं 2 जी उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा। महंगे 4जी मोबाइल खरीदने से छुटकारा मिलेगा। प्रीपेड से पोस्ट पेड और पोस्ट पेड से प्रीपेड में कन्वर्ट होने फिर से केवाईसी की आवश्यकता खत्म होगी। यानि अब एक ही बार केवाईसी कराना काफी होगा।

देय राशि के भुगतान पर मोहलत

मंत्रिमंडल ने दूरसंचार क्षेत्र के कुछ प्रमुख खिलाड़ियों के सामने आने वाले नकदी प्रवाह के मुद्दों को कम करने के लिए दूरसंचार कंपनियों द्वारा वैधानिक बकाया के भुगतान पर चार साल की मोहलत को भी मंजूरी दे दी है। मोराटोरियम का लाभ उठाने वाली कंपनियों को मोराटोरियम राशि पर एमसीएलआर + 2% की दर से ब्याज देना होगा। यानि अब मासिक चक्रवृद्धि के बजाय वार्षिक चक्रवृद्धि ब्याज किया जाएगा। इसके तहत एमसीएलआर + 2% ब्याज दर की उचित ब्याज दर की पेशकश की गई है और जुर्माना पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।

पीएम मोदी ने बताया ऐतिहासिक कदम

ज्ञात हो, कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान टेलीकॉम सेक्टर ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस दौरान डाटा के खपत में भारी वृद्धि हुई तो वहीं ऑनलाइन शिक्षा का प्रसार भी हुआ है। लोगों का घर बैठे सोशल मीडिया के माध्यम से आपसी संपर्क बढ़ा है और वर्चुअल बैठकों में वृद्धि हुई है। इन सब बातों की पृष्ठभूमि में ये सुधारात्मक उपाय ब्रॉडबैंड और टेलीकॉम कनेक्टिविटी के प्रसार और पैठ को और प्रोत्साहित करेंगे। कैबिनेट का यह फैसला एक मजबूत टेलीकॉम सेक्टर के प्रधानमंत्री के विजन को पुष्ट करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी टेलीकॉम सेक्टर के इस कदम की सराहना करते हुए इसे एक ऐतिहासिक क्षण बताया।

टेलीकॉम सेक्टर में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा, मिलेंगे अधिक विकल्प

बताना चाहेंगे कि इस पैकेज से अब टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और ग्राहकों को अधिक से अधिक विकल्प प्राप्त होगें। वहीं समावेशी विकास के लिए अंत्योदय का सपना साकार होगा। इससे हाशिए पर चले गए क्षेत्रों को मुख्यधारा में लाने में मदद मिलेगी और असम्बद्धों को जोड़ने के लिए सार्वभौमिक ब्रॉडबैंड की पहुंच को सुनिश्चित किया जा सकेगा। साथ ही साथ इस पैकेज से 4जी के प्रसार, पूंजी की तरलता के प्रेरण और 5जी नेटवर्क में निवेश के लिए अनुकूल माहौल के निर्माण को प्रोत्साहित करने की भी अपेक्षा है।

टेलीकॉम सेक्टर का इतिहास

गौरतलब हो 1994 में नेशनल टेलीकॉम पॉलिसी के तहत टेलीकॉम सेक्टर में उदारीकरण किया गया था और कंपनियों को निश्चित लाइसेंस फीस के बदले लाइसेंस दिए गए थे। निश्चित लाइसेंस फीस काफी ज्यादा थी, इसलिए सरकार ने 1999 में लाइसेंस लेने वालों को यह विकल्प पेश किया कि वे निश्चित लाइसेंस फीस की जगह कमाई में हिस्सेदारी के मॉडल को चुन सकते हैं। टेलीकॉम विभाग और टेलीकॉम कंपनियों के बीच जो लाइसेंस करार किए गए उनमें इन कंपनियों के कुल राजस्व को परिभाषित किया गया। इसके बाद एजीआर का हिसाब कुछ कटौतियों के बाद लगाया जाने लगा। एजीआर के दो तत्व हैं- लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूजर कीमतें। कुल मिलाकर यह सरकार के लिए रेगुलेटरी फीस के रूप में एजीआर के 15 प्रतिशत के बराबर होता है।

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