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आतंकवादी आतंकवादी होते हैं, उनमें अच्छे और बुरे का विभेद नहीं हो सकता: एस जयशंकर

पाकिस्तान को आतंकवादियों को शह देने के लिए जमकर आड़े हाथ लिया

नई दिल्ली: विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने ‘1373 को स्वीकार किए जाने के 20 वर्ष बाद आतंकवाद से लड़ाई में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग’ शीर्षक से खुली बहस में हिस्सा लिया. इस दौरान खुली बहस में पाकिस्तान को आतंकवादियों को शह देने के लिए जमकर आड़े हाथ लिया.

जयशंकर ने चीन का नाम लिए बिना आतंकवादियों के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई में बाधाएं खड़ी किए जाने की उसकी कोशिशों की निंदा की. साथ ही कहा कि इस तरह से UNSC की ओर से दी गई शक्तियों का दुरुपयोग किया जा रहा है.

विदेश मंत्री ने इस मौके पर आतंकवाद से निपटने और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए आठ सूत्री एक्शन प्लान का प्रस्ताव भी किया. जयशंकर ने मंगलवार को 1 जनवरी 2021 को भारत की ओर से UNSC की सदस्यता दोबारा संभालने के बाद ये पहला मौका था कि विदेश मंत्री ने हस्तक्षेप किया.

जयशंकर ने कहा कि दुनिया के लिए ये आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ दिखाने का वक्त है. पाकिस्तान का नाम लिए बिना विदेश मंत्री ने फोरम को बताया कि भारत किस तरह आतंकवाद से कई दशकों से लड़ाई लड़ रहा है.

जयशंकर ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मापदंडों के लिए कोई जगह नहीं बताई. उन्होंने कहा, “आतंकवादी आतंकवादी होते हैं. उनमें अच्छे और बुरे का विभेद नहीं हो सकता. जो इस तरह का विभेद करते हैं उनका एक एजेंडा है. जो उनकी हरकतों पर पर्दा डालते हैं, वो भी उनके जैसे ही गुनहगार हैं.

पाकिस्तान पर साधा निशाना

पाकिस्तान के संदर्भ में जयशंकर ने कहा, “आतंकवाद और ट्रांसनेशनल संगठित अपराध की पूरी तरह पहचान की जानी चाहिए और इनसे सख्ती से निपटा जाना चाहिए. हमने भारत में 1993 मुंबई बम विस्फोटों के लिए जिम्मेदार आपराधिक सिंडीकेट को 5 स्टार मेहमाननवाजी मिलते देखा.” उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत में आतंकवाद को मानवता के लिए सबसे गंभीर खतरा बताया. साथ ही कहा कि 9/11 हमले के बाद विश्व संस्था (UNSC) ने इस खतरे से निपटने के लिए प्रस्ताव 1373 को मंजूर कर मजबूत प्रतिबद्धता व्यक्त की है. जयशंकर ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने उग्रवादियों की ओर से भर्ती और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने की स्थिति को और चिंताजनक बताया है.

विदेश मंत्री ने ये भी इंगित किया कि उभरती तकनीकों ने आतंकवादियों और आतंकी संगठनों की घातक क्षमताओं को और बढ़ाया है. जयशंकर ने आगे कहा कि सोशल मीडिया नेटवर्क्स की भी कट्टरपंथ को बढ़ावा देने और इसके लिए भर्ती में भूमिका रही है. जयशंकर ने टेरर फाइनेंसिग को भी बड़ी समस्या बताया. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को सफल बनाने के लिए आतंकियों की वित्तीय संसाधनों तक पहुंच को बाधित करना बहुत जरूरी है.

विदेश मंत्री ने इस मौक पर आतंकवाद के खिलाफ आठ सूत्री एक्शन प्लान भी पेश किया. 1- आतंकवाद से खिलाफ लड़ने की सबको राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखानी होगी. इस लड़ाई में किंतु परंतु नहीं हो सकते. किसी को भी आतंकवाद को न्यायोचित ठहराने और आतंकियों का महिमामंडन की अनुमति नहीं होनी चाहिए. सभी सदस्यों को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी विरोधी संधियों में अपने दायित्वों को पूरा करना चाहिए. 2-आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मापदंडों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए. 3-आतंकवाद से लड़ने के उपायों और पाबंदियां लगाने वाली कमेटियों के काम करने के तरीके में सुधार होने चाहिए. पारदर्शिता, जवाबदेही और कारगर कार्रवाई आज की जरूरत है. जो इस काम में बाधा खड़ी करते हैं और बिना किसी कारण आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई मको रोके रखते है, ऐसी कोशिशों पर विराम लगना चाहिए. ये हमारी सामूहिक साख को नुकसान पहुंचाता है. 4-हमें दुनिया को बांटने वाली और हमारे सामाजिक तानेबाने को नुकसान पहुंचाने वाली सोच को हतोत्साहित करना चाहिए. ऐसी सोच से कट्टरपंथ को बढ़ावा मिलता है. 5-संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों के लिए निजी व्यक्तियों और संगठनों को सूचीबद्ध करना और सूची से बाहर करना तटस्थता के साथ होना चाहिए. इसमें राजनीतिक और धार्मिक कारणों को नहीं देखा जाना चाहिए. 6- आतंकवाद और ट्रांसनेशनल संगठित अपराध के बीच जुड़ाव की पहचान की जानी चाहिए और इन कड़ियों के साथ सख्ती से पेश आना चाहिए. 7-टेरर फाइनेंसिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है. फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) को एंटी मनी लॉन्ड्रिंग और काउंटर टेरर फाइनेंसिंग फ्रेमवर्क्स की कमजोरियों की पहचान कर उन्हें दूर करने के लिए कदम उठाते रहना चाहिए 8-संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद विरोधी संस्थाओं को संयुक्त राष्ट्र नियमित बजट से पर्याप्त फंडिंग सुनिश्चित करने पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है.

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