सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिलाईगढ़ में डॉक्टरों की अनुपस्थिति ने ली एक व्यक्ति की जान

योगेश केशरवानी:

बिलाईगढ़: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिलाईगढ़ में डॉक्टरों की अनुपस्थिति में एक व्यक्ति की मौत का मामला सामने आया है। बिलाईगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत देवरहा के चंद्रभूषण को अचानक उल्टी आने लगा। जिससे परिजन घबराकर 108 की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बिलाईगढ़ लाया।

जहाँ डॉ. की अनुपस्थिति में नर्सो द्वारा ईलाज किया गया। ईलाज के दौरान चंद्रभूषण की हालत ठीक था। नर्स ने ईलाज करना शुरू किया और दो ग्लूकोज बॉटल चढ़ाकर, इंजेक्शन लगाया। शरीर मे ग्लूकोज चढ़ते ही चंद्रभूषण के शरीर पूर्ण रूप से ठंड पड़ गया और मुँह से झाग निकलना शुरू हो गया, झाग निकलते ही चंद्रभूषण की मौके पर मौत हो गई।

वही दूसरी ओर परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉ के आने के समय बार बार नर्स से पूछता रहा परन्तु नर्स ने 5 मिनिट में आ जाएंगे कहकर बार बार टालता रहा और ईलाज करता रहा,,परिजनों की माने तो डॉ 1 घँटे बाद पहुंचा,, तब तक देर हो चुका था और चंद्रभूषण का मौत हो गया था, यदि डॉ सही समय पर उपस्थित रहता तो समय रहते चंद्रभूषण को बचाया जा सकता था,,

वही दूसरी ओर डॉक्टरों ने बताया कि चंद्रभूषण को स्वास्थ्य केंद्र लाया गया उस समय बी.पी. काफी बढ़ा हुआ था और उसे झटका आ रहा था, जिसका उन्हें ग्लूकोज बॉटल चढ़ाकर इंजेक्शन लगाया गया था। परिजनों के आरोप के बाद डॉ को स्वास्थ्य केंद्र आने का समय पूछा गया, उनके द्वारा बताया गया कि लगभग 9 से 9:30 बजे के आसपास स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे।

डॉक्टरों का नदारत रहना आम बात

गौरतलब बिलाईगढ़ स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों का नदारत रहना आम बात हो गई है, ऐसी स्थिति हमेशा बनी रहती है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधिकारियों को बात करने पर कहती है कि डॉ होकर ईलाज करें तो परेशानी… नहीं करें तो परेशानी..का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ देते है,

कहते है धरती पर भगवान के बाद दूसरा भगवान डॉ होता है जो लोगों का इलाज कर जान बचाते है,परन्तु डॉ ही अगर ऐसा कहें तो जनता का क्या होगा ए सोचने वाली बात है। ऐसे में अब देखना होगा कि बिलाईगढ़ स्वास्थ्य केंद्र में डॉ की मनमानी रवैये को लेकर स्वस्थ्य विभाग के अधिकारी और जिला प्रशासन तथा शासन क्या कुछ पहल करते है, और कब तक स्थिति सुधार पाएंगे।

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