छत्तीसगढ़

उद्योग की राखड निपटान नीति के आगे प्रशासन भी नतमस्तक! पर्यावरण विभाग नाम मात्र का जिम्मेदार, अधिकारियों ने भी साथ रखी है चुप्पी

हिमालय मुखर्जी ब्यूरो चीफ रायगढ़

रायगढ़: रायगढ़ में उद्योग की बाढ़ आने पश्चात उद्योगों से निकलने वाला राखड उद्योगों के लिए परेशानी का सबब बन चुका है, किंतु उद्योगों की मनमानी चरम सीमा पर ! वह इसके निपटान को किसी भी तरीके से करना चाहता है। इससे चाहे पर्यावरण प्रदूषित हो या जानलेवा स्थितियां निर्मित हो। इन्हें कोई लेना-देना नहीं और तो और इनकी जवाबदारी को याद दिलाने वाले पर्यावरण विभाग ने भी इनके आगे आंखें मूंद रखी है।

वैसे तो फ्लाई ऐश निपटान के लिए बहुत ही कठोर नियम बनाए गए हैं, लेकिन रायगढ़ में यह नियम उद्योग अपनी जेब में लेकर चलता है! क्योंकि इसकी देखरेख करने वाले शायद अब इन परिस्थितियों से समझौता कर चले हैं।क्रेशर के गढ़ कहे जाने वाले गुडेली तथा टीमरलगा में पहले ही कई अवैध खदानें खोदकर पत्थरों को निकाला गया अब यह विशालकाय गड्ढे लोगों के लिए परेशानी के साथ-साथ जानलेवा साबित हो रहे हैं। वैसे इनको पाटने वाले ठेकेदार किसी भी उद्योग से फ्लाई ऐश लाकर पाटते नजर आते हैं। व्यवस्थित तरीके से इसे ना पाटने से गुडेली मुक्तिधाम के बगल में कुछ दिन पूर्व फ्लाई ऐश से पाटी गई एक खदान भूस्खलन का शिकार बन गई। खुशनसीब रहे कि इसमें किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई! किंतु उक्त खदान का बचा हिस्सा कभी भी बड़े हादसे को जन्म दे सकता है। यू तो यहां कई उद्योगों कि फ्लाई ऐश बिना अनुमति के रोज यहां उड़ेली जाती है, लेकिन किसी भी उच्च अधिकारियों को इसकी सुध लेने की फुर्सत नहीं। क्या उद्योगों के आगे अधिकारी अपना मस्तक झुका लेते हैं?फ्लाई ऐश के निपटान को लेकर जब पर्यावरण अधिकारी से चर्चा की गई तो उन्होंने स्वयं की विभाग को छोड़कर सारे अधिकारियों के नाम गिना दिए। जिनको इस तरह की अनियमितताओं पर कार्रवाई करनी है तथा उन्होंने सारे नियम कानून भी गिना डालें सिर्फ उनके द्वारा की जाने वाली कार्रवाई ही उन्होंने नहीं बताई।

ग्राम पंचायत व अनुविभागीय अधिकारी देते हैं अनापत्ति प्रमाण पत्र

यू तो सुनने में यह भी आया है कि ग्राम पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना बहुत आसान है। कई जगह तो बिना ग्रामसभा के ही अनापत्ति प्रमाण पत्र दिए जाने की खबर सुनाई पड़ती है तथा कई जगह तो अनुविभागीय अधिकारी की जानकारी के बगैर ही फ्लाई ऐश डंप कर दिया जाता है। खरसिया विधानसभा के ग्राम पतरापाली मैं तो ग्राम सभा में 20 फीट के गड्ढे को पाट कर ऊपर शासन की महत्वकांक्षी योजना गौठान बनाने की चर्चा जोरों पर है।

रायगढ़ में फ्लाई ऐश वाकई एक समस्या बन चुका है इसे एनजीटी ने भी माना है। उद्योगों को अपने यहां से निकलने वाले फ्लाई ऐश निपटान की व्यवस्था व उससे होने वाले नफा नुकसान की जवाबदारी स्वयं लेनी है लेकिन एक अलग व्यवस्था बनाते हुए यहां सारी औपचारिकताएं ट्रांसपोर्ट करने वाले ठेकेदारों के द्वारा की जाती है तथा गुड़ेली जैसे गंभीर मामलों में किसी के ऊपर भी कोई चालान नहीं काटा जाता क्योंकि कई उद्योग की राख एक ही स्थान पर डाल दी जाती है तथा जवाबदेही स्वीकार कर आने वाले विभागों को भी शायद संतुष्ट कर लिया जाता है।
लोगों को पर्यावरणीय व गंभीर समस्याओं से कब तक यूं ही जुझने छोड़ दिया जाएगा इसका जवाब प्रशासन नहीं दे सकता है।

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