सोसायटी संचालक की मनमानी, निर्धारित मात्रा से कम दिया जा रहा राशन

संचालक के खिलाफ तमाम उच्चाधिकारियों को लिखित शिकायत दी

कोरबा:

सोसायटी संचालक की मनमानी व दबंगई तथा अभद्रता से तंग आकर आखिरकार सुमेधा जमनीपाली की दो दर्जन महिलाओ ने संचालक के खिलाफ जमकर हल्ला बोला है उसके खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जिलाधीश सहित तमाम उच्चाधिकारियों से इस बाबत की लिखित शिकायत दी है ।

सरकार ने गरीब और अंत्योदय परिवार के लिए गुलाबी राशनकार्ड बनाया है ताकि सभी को राशन ,शासन द्वारा निर्धारित दर पर प्राप्त हो सके।शासन गरीब तपके के लिए नई नई योजनाएं लाकर सभी को राहत देने का प्रयास कर रही।

जमनीपाली सोसायटी संचालक रमेश अग्रवाल लगभग बीस बरसो से सोसायटी का संचालन करते आ रहा है। यहाँ आसपास के सभी कार्डधारी कई किलोमीटर दूर से पैदल चलकर राशन लेने पहुँचते हैं।जिसमे ज्यादात्तर वृद्ध महिलाएं और विधवा महिलाएं शामिल हैं।

शुरू शुरू में तो सब ठीक चलता रहा पर धीरे धीरे संचालक ने अपना रंग दिखाना चालू कर दिया और गरीबो के हक के राशन में सेंध मारने का काम चालू किया। विधवा महिलाओं को गुलाबी राशनकार्ड से मिलने वाला चावल 35 kg शासन द्वारा निर्धारित है लेकिन संचालक ने विधवा और लाचार महिलाओं को पैतीस किलो ना देकर केवल दस किलो राशन दिया जाता है

जब वृद्ध महिलाएं पूछती हैं कि ये तो कम चावल ह तो संचालक बोलता है कि तुम्हारा राशन आगे से ही कम आ रहा है ये सुनकर लाचार महिलाएं सरकार को कोसती हुई मजबूर होकर दस किलो चावल लेकर घर आ जाती हैं।

इतना ही नही अन्य सामाग्री चना , शक्कर, मिट्टी तेल भी आधा अधूरा दिया जाता है। संचालक ने गरीबों का हक मारने में कोई कमी नही की है।निर्धारित समय पर दुकान भी नही खोली जाती और आये दिन कुछ ना कुछ बहाना बनाकर राशन वितरण रोक कर गरीबो के हक का राशन अन्य स्थान में बिक्री कर मोटी कमाई कर रहा।

ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार संचालक से हर कार्डधारी परेशान है लेकिन संचालक की पहुँच परख ऊपर तक होने की वजह से कोई सामने आकर इसकी शिकायत शासन प्रशासन से नही करता। लेकिन इस बार सुमेधा की महिलाओं ने ग्राम में एकजुट होकर संचालक के खिलाफ खुलकर सामने आने की ठानी और सभी महिलाएं कलेक्ट्रेट पहुचकर दिए आवेदन और अन्य अधिकारियों से भी की शिकायत।

महिलाओ ने बताया कि संचालक राशन तो कम देता ही है और कम देने का कारण पूछो तो अभद्र व्यवहार कर भगा देता है,डरे सहमे हितग्राही दबंग संचालक के आगे टिक नही पाते और वर्षो से इस कालाबाजारी को झेल रहे हैं।

दबंग संचालक के खिलाफ वृद्ध महिलाओं ने आवाज उठाई है अब तो देखने वाली बात ये है कि शासन इन लाचार महिलाओ की मदद कैसे करता है और इसको कैसे न्याय दिलाता है। सुमेधा की महिलाओं में बताया कि हमको पांच किलोमीटर पैदल चलकर सोसायटी जाना पड़ता है।

जो कि हम बुजुर्ग महिलाओ के लिए बहुत ही परेशानी का सबब है। हमारे गाँव में भी महिला समूह है और समूह के पास कोई रोजगार भी नही है इसलिए हम समूह की महिलाएं चाहती है कि सोसायटी समूह को मिले ताकि समूह के सभी महिलाओं को रोजगार मिल सके और बुजुर्ग महिलाओं को दूर राशन लेने के लिए जाना ना पड़े।

महिलाओ ने शासन से गुहार लगाई है कि संचालक का लाइसेंस निरस्त किया जाए और सोसायटी महिला समूह को दी जाए।

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