भालू ने बैल को बनाया अपना शिकार, रेस्क्यू टीम और वन विभाग ने पकड़ा

रवि सेन

बागबाहरा। रविवार सुबह जंगल से भटक कर आए एक भालू ने ग्राम जुनवानी में एक बैल को अपना शिकार बनाया। इसके बाद हिंसक हो गए भालू को पकड़ने वन विभाग को पूरे दो दिन जमकर मशक्कत करनी पड़ी। भालू एक खेत के पीछे जाकर छिप गया था।

इसी बीच सोमवार दोपहर को रेसक्यू टीम पहुंचने से पहले ही भालू वन विभाग अमला को काफी परेशान कर रखा था। बीच बीच मे लोंगों की भीड़ की ओर रुख करने से भीड़ में अफरा-तफरी मच गई। बहरहाल शाम को चार बजे कड़ी मशक्कत के बाद भालू को ट्रैंक्यूलाइज कर काबू में किया जा सका। भालू को अब बार नयापारा अभयारण्य में ले जाकर छोड़ा जाएगा। उसे पकड़ने में तीन घंटे से ज्यादा समय लग गया।

वन विभाग के पास संसाधन का अभाव-

बागबाहरा में ट्रैंक्यूलाइज गन व दवा नहीं होने के कारण रायपुर से मंगाया गया। इससे पहले उस भालू को वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा जाल का घेरा लगाकर पिंजरे लगाए गए और रायपुर के नंदनवन से ट्रैंक्यूलाइज करने दवा मंगाई गई। रायपुर के नन्दनवन से पांच सदस्यीय रेस्क्यू टीम बागबाहरा पहुंची। जिसमे डॉ राकेश वर्मा वन्य प्राणी चिकित्सक नंदनवन, गिरीश रजक फारेस्ट गार्ड नंदनवन, चुम्मन निषाद, रमाकांत, बीरबल यादव शामिल थे। तीन घंटे के कड़ी मशक्कत के बाद भालू पर काबू पाया गया।

वन अमला दिन भर डटे रहे- रविवार को सुबह भालू के द्वारा एक बैल को मारने की खबर से प्रशासन में हड़कंप मच गया। सुबह से रेंजर मनोज चंद्राकर ने पूरे इलाके का निरीक्षण कर कर्मचारियों को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए।

दूसरे दिन सोमवार रेस्क्यू टीम और वन विभाग द्वारा भालू को पकड़ा गया। इस दौरान रेंजर मनोज चंद्राकर, प्रशिक्षु रेंजर केसरी साहू, मोती राम साहू, भरत साहू, भुनेश्वर तिवारी, मुश्ताक अली, नरेंद्र चंद्राकर, लोकेंद्र आवडे, नीलकंठ दीवान, पूनम साहू, मिलन साहू, राजू साहू, पारस चंद्राकर, उदेनाथ डड़सेना, अमित दीवान, ललित यादव, पुरन ध्रुव, मनोज सहित वन अमला जुटे रहे।

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