धर्म/अध्यात्म

कल से शुरू होने जा रही हैं छठ पर्व की शुरुआत, जानें छठ के हर दिन का महत्व

महिलाएं निर्जला व्रत रख अपनी संतान व पति की लंबी आयु की करेंगी कामना

पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत, बिहार और झारखंड के हिस्सों में मनाए जाने वाले छठ पर्व की शुरुआत 11 नवंबर से होने वाली हैं। छठ में भगवान सूर्य की उपासना की जाती हैं। इस व्रत को करने के नियम बेहद कठिन होते हैं। इसमें स्त्रियां 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखती हैं। और अपनी संतान व पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। इस व्रत को पुरुष भी करते हैं।

छठ व्रत का त्योहार चार दिनों का होता हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार छठ का पर्व कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को शुरू होता हैं और यह सप्तमी तक चलता हैं। पर्व के पहले दिन यानी कि चतुर्थी के दिन नहाय खाय का नियम होता हैं। दूसरे दिन खरना और तीसरे शाम को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता हैं तथा व्रत के आखिरी और चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता हैं।

छठ पर्व के हर दिन का खास महत्व हैं। आइये जानते हैं कि छठ के हर दिन का क्या महत्व हैं।

1. छठ का पहला दिन: नहाय खाय

पहले दिन नहाय खाय की विधि होती है. जो शहर या गांव गंगा माता के किनारे हैं, वहां औरतें गंगा स्नान करती हैं। नहाय खाय के दिन इसमें घर की साफ सफाई करने और स्नानादि करने के बाद शुद्ध शाकाहारी भोजन किया जाता हैं। व्रती के भोजन करने के बाद ही घर के बाकि सदस्य भोजन करते हैं और फिर इस व्रत की शुरुआत होती हैं। बिहार में खरना व्रत रखने वाली महिलाएं नहाय खाय के दिन लॉकी की सब्जी जरूर खाती हैं।

2. छठ का दूसरा दिन: खरना

छठ पूजा के दूसरे दिन खरना की विधि होती हैं। इस दिन व्रती को पूरे दिन का निर्जला उपवास रखना होता है. शाम को गन्ने का जूस या गुड़ के चावल या गुड़ की खीर का प्रसाद बांटा जाता हैं। यही प्रसाद व्रती महिलाएं भी खाती हैं। खरना को कुछ जगहों पर छोटकी छठ भी कहा जाता हैं। क्योंकि 36 घंटे का व्रत शुरू होने वाले व्रत से ठीक पहले होता हैं। इसके बाद से ही 36 घंटे का कड़ा निर्जला व्रत शुरू हो जाता हैं।

3. छठ का तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य

छठ के तीसरे दिन व्रती नदी या तालाब में उतरकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देती हैं। इसे संध्या अर्घ्य कहा जाता हैं। इस दिन प्रसाद स्वरूप ठेकुआ और चावल के लड्डू बनाए जाते हैं। रात में छठी माता के गीत गाए जाते हैं। और इस व्रत की कथा का पाठ होता हैं।</>

4. छठ का चौथा दिन और अंतिम दिन: ऊषा अर्घ्य

छठ पूजा के चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता हैं। इसे ऊषा अर्घ्य कहते हैं। इस दिन सूर्य निकलने से पहले ही लोग नदी या तालाब के घाट पर पहुंच जाते हैं। व्रती पानी में उतर कर सूर्य को अर्घ्य देती हैं। इसके बाद घाट पर ही पूजा की जाती हैं। पूजन के बाद व्रती प्रसाद खाकर व्रत खोलती हैं। और प्रसाद को सभी में बांट दिया जाता हैं।<>

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