छत्तीसगढ़

सबसे बड़ा घोटाला – जनता को राफेल डील की सच्चाई से रूबरू करायेगें : शक्ति सिंह

- विकल्प तललवार

बिलासपुर : भारतीय इतिहास में राफेल सौदे में देश का सबसे बड़ा घोटाला हुआ है। केन्द्र सरकार ना तो सदन में चर्चा के लिए तैयार है। और ना ही सदन के बाहर जवाब दे रही है। प्रति विमान को कांग्रेस सरकार ने 526.10 करोड़ में खरीदने का समझौता किया था। लेकिन मोदी सरकार ने उसी लड़ाकू विमान को 1670.70 करोड़ में खरीदा है। राफेल घोटाला से बचने के लिए ही मात्र चार साल में तीन रक्षा मंत्री बदल दिए गए। वर्तमान रक्षा मंत्री राजनीतिक रूप से अपरिपक्व हैं। उनके कंधे का इस्तेमाल कर घोटाला को अंजाम दिया गया है। यह बातें कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और बिहार प्रदेश प्रभारी शक्ति सिंह ने पत्रकार वार्ता में कही।

शक्ति सिंह गोहिल ने बताया कि िदा में मनममोहन सरकार ने भारतीय फौज की मांग पर राफेल लड़ाकू विमान का सौदा किया। निविदा में दो बड़ी कम्पनियों को दाव लगाया गया। बेहतर तकनीकि और अच्छी मारक क्षमता के साथ सबसे कम कीमत वाली विमान राफेल का सौदा किया गया। तात्कालीन मनमोहन सरकार ने 526.10 करोड़ में प्रति विमान का सौदा किया। लेकिन 10 अप्रैल 2015 में पेरिस पहुंकर प्रधानमंत्री ने प्रति विमान 1670.70 करोड़ में उसी विमान को खरीदने का एलान कर दिया। विमान के कलपूर्जे और रखरखाव की जिम्मेदारी अनिल अम्बानी को दिया। जबकि सारा काम हिन्दुस्तान एयरोनाटिक लिमिटेड को होना था। खुद अनिल अम्बानी ने बताया कि सौदे में एक हजार करोड़ डालर की लाइफ टाइम सौदा है।

गोहिल ने बताया कि प्रधानमंत्री से हमारा गहन सम्पर्क रहा है। गुजरात के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। उनका कहना कि ना खाउंगा ना खाने दूंगा सरासर जुमला है। सच्चाई तो यह है कि वह सच बोलने वाले को जीने नहीं देते हैं।

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