छत्तीसगढ़

अंतागढ़ बचाने बीजेपी को लगाना होगा जोर, बदलेगा चेहरा

प्रदीप शर्मा

रायपुर।

साल 2003 के परिसीमन में अंतागढ़ तहसील और पखांजूर तहसील को मर्ज कर अस्तित्व में आई अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित अंतागढ़ विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान में भाजपा का कब्जा है। यहां से भोजराज सिंह विधायक चुने गए हैं।

साल 2008 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा ने जीत के साथ अपना खाता खोला था। भाजपा ने विक्रम उसेंड़ी को अपना उम्मीदवार बनाया था वहीं कांग्रेस की ओर से मंतूराम पवार मैदान में थे। भाजपा के विक्रम उसेंड़ी ने बहुकोणीय मुकाबले में कांग्रेस के मंतूराम पवार को 109 मतों के मामूली अंतर से हराया।

विक्रम उसेंड़ी को 37255 मत मिले वहीं मंतूराम पवार को 37146 मतों से संतोष करना पड़ा। निर्दलीय ओमप्रकाश पाडा 3.80 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 3083 मत प्राप्त कर तीसरे स्थान पर रहे। बसपा के मेहताब सिंह राणा 2.40 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 1950 मत प्राप्त कर चौथे स्थान पर रहे। वहीं सीपीएम के राजीव ध्रुवा 2.20 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 1784 मत प्राप्त कर पांचवें स्थान पर रहे।

साल 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपने पूर्व विधायक विक्रम उसेंड़ी को दोबारा मैदान में उतारा, जो अपनी जीत बचा पाने में कामयाब रहे। इस चुनाव में भाजपा के विक्रम उसेंड़ी ने अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी मंतूराम पवार को बहुकोणीय मुकाबले में 5171 मतों से हराया। नोटा 4.16 प्रतिशत वोट शेयर के साथ तीसरे स्थान पर रहा। सीएसएम के सोमनाथ उइके 2.24 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 2543 मत प्राप्त कर चौथे स्थान पर रहे। वहीं निर्दलीय जयप्रकाश पड्डा 2.04 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 2308 मत प्राप्त कर पांचवें स्थान पर रहे।

-2014 के उप चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी ने बिना लड़े ले लिया था नाम वापस

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अपने विधायक विक्रम उसेंड़ी को कांकेर लोकसभा सीट से अपना प्रत्याशी बनाया था। जो जीत कर संसद में पहुंचने में कामयाब रहे। उसेंड़ी के इस्तीफे के बार साल 2014 में अंतागढ़ में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने मंतूराम पवार को अपना उम्मीदवार बनाया था। वहीं भाजपा की ओर से भोजराज नाग मैदान में थे।

इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मंतूराम पवार ने चुनाव से पहले नाम वापसी का आवेदन कर पार्टी को चौंका दिया था। कांग्रेस ने इस चुनाव में अंबेडकराइट पार्टी के रूपधर पुडो को समर्थन दिया था। जिन्हें भाजपा के हाथों हार का सामना करना पड़ा। भाजपा के भोजराज नाग ने सीधे मुकाबले में अंबेडकराइट पार्टी के रूपधर पुडो को 51530 मतों से हराया। इस चुनाव में 13506 मत प्राप्त कर नोटा को दूसरा स्थान मिला।

इसका मतलब है कि बड़ी तादाद में लोगों ने इस सीट पर खड़े हुए किसी भी उम्मीदवार को पसंद नहीं किया और अपना मत उन सभी उम्मीदवारों के खिलाफ दिया। अंतागढ़ विधानसभा सीट के लिए कुल 14 प्रत्याशियों ने अपने नामांकन दाखिल किए थे।

जांच के दौरान एक प्रत्याशी का नाम रद्द हो गया तथा 29 अगस्त 204 को कांग्रेस के मंतूराम पवार ने अपना नाम वापस ले लिया था। बाद में 10 अन्य प्रत्याशियों ने अपना नाम वापस ले लिया था।

कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा में शामिल हुए मंतूराम पवार को इस बार भाजपा अपने प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतार सकती है। वहीं कांग्रेस को जिताऊ चेहरे की तलाश है। इस बार जोगी-बसपा-सीपीआई गठबंधन और आम आदमी पार्टी के अलावा सर्व आदिवासी समाज भी अपने उम्मीदवार उतारेगी। ऐसे हालात में भाजपा को अपनी अंतागढ़ सीट को बचाए रखने के लिए जोर लगाना होगा।

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