छत्तीसगढ़

दृष्टिहीन जूडो खिलाड़ी ने फिल्म में निभाया खुद का किरदार

खजुराहो।

‘चाहे कितना भी ऊंचा कर दो आसमान को, रोक न सकोगे मेरी उड़ान को” कुछ इन्हीं पंक्तियों को चरितार्थ करती हैं होशंगाबाद के निमसाड़िया गांव की दृष्टिहीन बालिका प्रिया। वह जूडो की राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी हैं। प्रिया जन्म से ही दृष्टिहीन हैं। लेकिन सीखने का जज्बा और जुनून ऐसा कि उन्होंने न केवल 12वीं तक पढ़ाई की, बल्कि लखनऊ में आयोजित दिव्यांगों के राष्ट्रीय खेलों में गोल्ड मेडल भी हासिल किया। प्रिया की इस उपलब्धि पर आठ मिनट की शॉर्ट फिल्म ‘मेरी उड़ान” बनाई गई तो उसमें किसी अभिनेत्री ने नहीं, बल्कि स्वयं प्रिया ने ही अपना किरदार निभाया।

खजुराहो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के दूसरे दिन टेंट में बनी टपरा टॉकीजों में मंगलवार सुबह देश-विदेश की फिल्मों का जलवा बिखरा। यूं तो फिल्मों के प्रदर्शन की शुरुआत गुड़गांव की कथक नृत्यांगना स्वप्ना सैनी निर्देशित व धरती मां को नमन करती हुई खजुराहो और बुंदेलखंड को समर्पित संस्कृत में फिल्म ‘वन्देमातरम” से हुई।

कला, संस्कृति, धरोहर के माध्यम से ईश्वर से साक्षात्कार कराने वाली इस फिल्म को समीक्षकों, निर्देशक राहुल रवेल और अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा से बेहद सराहना मिली। अलबत्ता, होशंगाबाद जिले के छोटे से गांव निमसाड़िया गांव की निवासी जूडो की दृष्टिहीन राष्ट्रीय खिलाड़ी प्रिया के जीवन पर आधारित कहानी की फिल्म ‘मेरी उड़ान” को महोत्सव में सबसे ज्यादा सराहा गया।

परेश मसीह निर्देशित इस फिल्म की खासियत यह है कि फिल्म का मुख्य किरदार यानी जूडो की राष्ट्रीय खिलाड़ी प्रिया का किरदार खुद प्रिया ने निभाया। प्रिया ने अपना संघर्ष असल जिंदगी में तो जिया ही, पर्दे पर भी बखूबी पेश किया।

लड़कियां कमजोर नहीं

फिल्म फेस्टिवल में पहुंची प्रिया ने कहा कि मेरी फिल्म दिव्यांग ही नहीं, सामान्य लड़कियों के लिए भी प्रेरणादायक है। लड़कियों को खुद को कभी कमजोर नहीं समझना चाहिए।

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