2005 से 2017 तक लगातार पदोन्नती का ख़ामियाज़ा एक्सप्रेस वे…जवाब दे भाजपा – संजीव अग्रवाल

अनिल राय की पदोन्नती पर संजीव अग्रवाल का सवालिया निशान

रायपुर: आरटीआई कार्यकर्ता संजीव अग्रवाल ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ की पूर्व रमन सरकार ने आईएएस अधिकारी अनिल राय से पदोन्नति के बदले चुनावी फंड का सौदा किया था इसलिए नियमों को ताक पर रखकर उन्हें अपने वन विभाग में वापस भेजे बिना पदोन्नत कर दिया गया।

पीडब्ल्यूडी विभाग में बिना नियमों की परवाह किए प्रमोशन

आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार, संजीव अग्रवाल कहा कि 2005 के बाद 2012 और फिर 2017 में एक अधिकारी पर तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह इतने मेहरबान क्यों थे? एक आईएफएस अधिकारी को पीडब्ल्यूडी विभाग में बिना नियमों की परवाह किए प्रमोशन कैसे दे दिया। ऐसा कौन सा डर था डॉ रमन सिंह को अनिल राय से? या फिर कोई मजबूरी या कोई सांठगांठ? दाल में कुछ तो काला है।

संजीव अग्रवाल ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार द्वारा आईएफएस अधिकारी अनिल राय को प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ सड़क विकास निगम के पद पर पदस्थ किया गया। उन्हें पीडब्ल्यूडी सचिव के पद से मुक्त तो कर दिया लेकिन ओएसडी के रूप में वे विभाग में बने रहे। आखिर क्यों? क्या अनिल राय से तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह की कोई डील हुई थी?

सड़क निर्माण जैसे अहम विभाग की ज़िम्मेदारी सौंप दी गई

वन विभाग के एक अफ़सर को किन खूबियों, योग्यताओं और काबिलियत के आधार पर सड़क निर्माण जैसे अहम विभाग की ज़िम्मेदारी सौंप दी गई? बिना योग्यता और अनुभव के सड़क निर्माण जैसे विभाग की बागडोर एक वन अधिकारी के हाथों में देने का नतीजा ही है कि सडकें उदघाटन से पहले उखड़ रही हैं और ब्रिज भी धँस रहे हैं।

अनिल राय की नियुक्ति कर पूर्व रमन सरकार ने लोक निर्माण विभाग में कार्यरत अन्य कर्मचारियों और अफसरों की योग्यता पर ही नहीं बल्कि राज्य में काम कर रहे अन्य अनुभवी प्रशासनिक सेवा के आईएएस अफसरों की योग्यता पर भी संदेह जताया था।

रमन सिंह को स्पष्ट करना चाहिए कि किन मजबूरियों और खूबियों के चलते वन विभाग के एक ऐसे अफ़सर को लोक निर्माण विभाग में सड़क निर्माण की बागडोर सौंप दी, जिसे सड़क निर्माण का रत्ती भर भी न तो तकनीकी और मैदानी ज्ञान है और न ही अनुभव।

रमन सिंह सरकार और उनके अफसरों की जवाबदारी तय की जानी चाहिए

ऐसे अनुभवहीन अफ़सर के मार्गदर्शन में बनी घटिया सड़कों के लिए रमन सिंह सरकार और उनके अफसरों की जवाबदारी तय की जानी चाहिए बल्कि घटिया निर्माण से जनता के टैक्स के पैसों की जो बर्बादी हुई है उसकी भी वसूली कर जिम्मेदारों पर कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए।

संजीव अग्रवाल ने मीडिया का ध्यान आकर्षण करते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ में रायपुर रेलवे स्टेशन से केन्द्री तक की लगभग 22 किलोमीटर लंबा का एक्सप्रेस-वे लोकार्पण होने से पहले ही अपनी गुणवत्ताविहीन होने के कारण धंसना शुरू हो गया है।

जनता की गाढ़ी कमाई को पूर्व की रमन सरकार द्वारा अपने चुनावी लाभ के लिए ऐसे लोगों को पदोन्नत किया गया है जिसका जीता जागता उद्धरण है राजधानी में बना रायपुर रेलवे स्टेशन से केन्द्री तक की लगभग 22 किलोमीटर लंबा का एक्सप्रेस-वे।

लोकार्पण होने से पहले ही गुणवत्ताविहीन होने के कारण धंसना शुरू हो गया है। पूर्व में बीजेपी के शासनकाल में इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से करवाया गया है जो कि छत्तीसगढ़ की जनता की खून पसीने की कमी थी जिसका पूर्व की सरकार द्वारा जो नियमों को ताक में रख कर किया गया। ये सब उसी का ख़ामियाज़ा है जिसका जवाब भाजपा के लोगों को देना होगा।

आज अब टीवी डिबेट से भाग रही भाजपा

संजीव अग्रवाल ने कहा कि पूर्ववर्ती रमन सरकार में किए गए घोटालों की वजह से आज भाजपा अब टीवी डिबेट से भाग रही है क्योंकि जनता के सवालों का जवाब उनके पास नहीं है और भाजपा के लोग अपनी बगलें झांक रहे हैं।

इसलिए मैं छत्तीसगढ़ के वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से विनती करता हूँ कि इस प्रकरण को वे अपने संज्ञान में लेकर इसकी जांच करवाएं क्योंकि अभी तो भाजपा सरकार और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के घोटालों पर से धूल छंटनी शुरू हुई है आगे इनका असली मुक़ाम जेल की कोठरी ही है।

Back to top button