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कोल इंडिया को केंद्र सरकार ने कहा कोयला उत्पादन बढ़ाने को

कोल इंडिया को केंद्र सरकार ने कहा कोयला उत्पादन बढ़ाने को

कोयले की मजबूत मांग को देखते हुए केंद्र ने सरकारी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) को कोयले का उत्पादन बढ़ाने के लिए कहा है. साथ ही कोयले का वितरण 16 लाख टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 20 लाख टन प्रतिदिन करने के लिए कहा है.

सरकार की ओर से कोल इंडिया को यह निर्देश ऐसे समय दिया गया है जब देश में बिजली संयंत्र कोयले के संकट से जूझ रहे हैं.

कोयला सचिव सुशील कुमार ने कहा, ‘कोयला की मांग में मजबूती है. हमने कोल इंडिया को प्रतिदिन 20 लाख टन कोयले का उत्पादन और वितरण करने के लिए कहा है.

वर्तमान में कोल इंडिया करीब 16 लाख टन कोयले का वितरण करता है. इसलिए कोल इंडिया के लिए 20 लाख टन प्रतिदिन कोयला उत्पादन और वितरण का लक्ष्य रखा गया है.

कुमार ने भरोसा जताया है कि मानसून को देखते हुए कोल इंडिया लक्ष्य को हासिल करने में सक्षम होगा. हालांकि, यह काम रातोरात नहीं हो जाएगा, लेकिन इस लक्ष्य को हासिल कर सकता है.

उन्होंने कहा कि बिजली क्षेत्र को अगस्त महीने में किया गया कोयला वितरण पिछले साल इसी महीने की तुलना में 14.4 प्रतिशत अधिक है और सितंबर महीने में यह पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक है.

पुराना कोयला भंडार 31 मार्च तक खत्म हो जाएगा कोयला सचिव ने बताया कि ईंधन की मांग में वृद्धि को देखते हुए सरकार ने कोल इंडिया को कोयला भंडार को खत्म करने करने के लिए कहा है.

इस वित्त वर्ष की शुरुआत में कोल इंडिया के पास निकासी के लिए करीब 6.9 करोड़ टन का कोयला भंडार था. जो कम होकर 3 करोड़ टन रह गया है. अब जो कोयला भंडार बचा है वो कुछ महीनों का ताजा भंडार होगा. मुझे महसूस हो रहा है कि पुराना कोयला भंडार (3 करोड़ टन) 31 मार्च तक समाप्त हो जाएगा.

हाल ही में बिजली संयंत्रों में कोयले के कम भंडार के लिए कुमार ने संयंत्रों को ही जिम्मेदार ठहराया था और कहा था कि देश में कोयले की कोई कमी नहीं है. उन्होंने कहा था कि संयंत्रों को कोयले का भंडार रखने के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण :सीईए: के दिशानिर्देशों का अनुपालन करना चाहिए.

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस महीने केंद्र सरकार से कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कहा था. वहीं, राजस्थान ऊर्जा विकास निगम ने पिछले महीने कहा था कि कोयले की कमी के कारण ताप बिजली संयंत्रों में बिजली उत्पादन में 2700 मेगावाट की कमी आई है.

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