चैतमा वनपरिक्षेत्र के बेशकीमती सागौन जंगल में आग लगने से वनौषधि, छोटी झाड़ियां सहित घास जलकर खाक

कोरबा: कटघोरा वनमंडल के पाली उपवनमण्डल अंतर्गत चैतमा वन परिक्षेत्र के चटुवाभौना स्थित बेशकीमती सागौन जंगल में आज दोपहर एकाएक आग लग जाने से छोटी झाड़ियां,घास सहित वनौषधि पौधे जलकर पूरी तरह नष्ट हो गए।पाली उपवनमण्डल मुख्यालय से कटघोरा मार्ग पर महज 7 किलोमीटर दूर मुख्यमार्ग किनारे हजारों हेक्टेयर में स्थित सागौन जंगल मे लगी भीषण आग घंटो धधकती रही।

लेकिन वनअमले को इसकी भनक भी ना लगी।तथा आसपास के ग्रामीणों द्वारा जंगल मे तेजी से बढ़ते आग को बुझाने का काम किया गया।और जब तक इसमें काबू पाया जा सका तबतक जंगल के एक बड़े हिस्से में उगे औषधीय पौधे,झाड़ियां व घांस जलकर राख हो चुका था।

प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्षों पूर्व वनविभाग द्वारा चैतमा परिक्षेत्र के चटुवाभौना में सागौन का प्लांटेशन किया गया है।जिसकी कीमत आज करोड़ो में है।उक्त सागौन जंगल हजारों हेक्टेयर के दायरे में विकसित है।

यहां भारी मात्रा में वन औषधि की भी भरमार है।तथा हिरण,कोटरी,बारहसिंगा जंगली सुअर सहित जमीन पर रेंगने वाले वन्य जीव जंतु इस क्षेत्र में स्वच्छंद विचरण करते हैं।जिससे यह कंपार्टमेंट अत्यंत महत्वपूर्ण है।

जहाँ आज दोपहर आग लगने से बड़े पेड़ों को तो नुकसान नहीं हुआ,अपितु एक बड़े हिस्से में वन औषधि,छोटी झाडिय़ां,सहित वन्य प्राणियों का चारा जलकर स्वाहा हो गया।हर वर्ष ग्रीष्मऋतु के समय शासन द्वारा जंगल को दावानल से बचाने पूर्व व्यवस्था के तहत भारी भरकम राशि प्रदान की जाती है।

फिर भी वन विभाग इस दिशा पर हमेशा से लापरवाह रहा है।प्रतिवर्ष फायर वाचर के रूप में भी नियुक्तियां होती हैं।लेकिन रोकथाम सिफर रह जाता है।और विभाग आग लगने के बाद हमेशा लीपापोती में संलिप्त रहकर अपनी नाकामी को छिपाने का प्रयास करता है।

आग लगने की इस घटना में जब घटनास्थल पर पहुंचा गया तब घंटो पूर्व लगी आग जंगल के एक बड़े क्षेत्रफल को अपनी चपेट में लेते हुए मुख्यमार्ग के किनारे पहुँच चुका था।और आग की लपटों से उठता सफेद धुंआ आसपास वातावरण में घुल चुका था।

जहाँ कुछ देर बाद मौके पर पहुँचे ग्रामीणों द्वारा आग बुझाने का काम किया गया।यदि समय रहते आग पर काबू नही पाया जाता।तब तेजी से फैलता आग पूरे जंगल को अपनी चपेट में ले लेता।

ज्ञात हो कि गर्मी के मौसम में अक्सर जंगलों में आग लगने की घटना सामने आती है।इसमें सबसे ज्यादा खतरा जंगल मे विचरण करने वाले जानवरों को होता है।लेकिन विभाग आग लगने की घटना को लेकर गंभीर नही रहता।

परिक्षेत्राधिकारी एयरकंडीशनर में बैठे-बैठे बीटगार्ड के भरोसे जिम्मेदारी सौंप अपने कर्तव्यों की ईश्रीति कर लेते है।जबकि बीटगार्ड अपने ड्यूटी के बजाय घर मे आराम फरमाते रहते है।

जब इस घटना की सूचना देने चैतमा रेंजर एन के सिन्हे से उनके मोबाइल क्रमांक 7587012406 पर सम्पर्क करने का प्रयास किया गया।तब उनका उक्त नंबर आउट ऑफ कव्हरेज मिला।जिसके कारण उनसे संपर्क नही हो पाया।

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