संपादकीय

नशे के प्रति युवाओं का रुझान चिंता का विषय

–उज़मा प्रवीन
भारत वर्तमान में विश्व का सबसे बड़ा युवा शक्ति प्रधान देश है। इसका भविष्य युवाओं पर टिका है पर क्या!! वे स्वस्थ है?? ये जानना आवश्यक है क्यूंकि जब युवा ही स्वस्थ नही होंगें तो भारत का भविष्य कैसे स्वस्थ और सुरक्षित हो सकता है? और स्वस्थ और सुरक्षित युवाओं के बिना विकसित देश की कल्पना नही की जा सकती।
युवाओं के बीच नशे का सेवन आधिक बढ़ गया है| वे नशे के इतने आदि हो गए है कि इसके बिना रह नही सकते| आज 12 साल का बच्चा भी धूम्रपान एवं नशीले पदार्थों का सेवन सहज रुप से कर रहा है| धूम्रपान तो युवाओं के बीच आम बात हो गई है | इससे ना केवल युवाओं के जीवन में बल्कि उनके परिवारों के जीवन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है|
छत्तीसगढ़ के रायपुर में रहने वाली 34 वर्षीय कमला “साज-श्रृंगार के दुकान में काम करती है अपने पति के बारे कहती हैं मेरे पति लंबे समय से शराब पीते रहे हैं उनकी इस आदत के कारण बड़े बेटे ने भी शराब पीना शुरु कर दिया है। जब भी उसे मौका मिलता है शराब पीकर ही घर आता है”।
बिहार के 28 साल के रेयाज़ ने बताया “पेशे से मैं एक ड्राईवर हूं कोई बुरी आदत नही सिवाय गुटका खाने के। दिनभर में जबतक 5-6 पैकेट गुटका न खा लुं मुझे सुकुन नही मिलता और न काम करने में मन लगता है। कई सालों से इसे छोड़ने की कोशिश कर रहा हूं पर नही कर पा रहा”।
साल 2016 मे आई फिल्म “उड़ता पंजाब” आपको याद होगी जिसमें दवाइयों के दुरूपयोग और उसकी गंभीर वास्तविकता को दिखाया गया है|” आज बच्चों के बीच दवाइयों का दुरूपयोग तेज़ी से बढ़ रहा है कारणवश अपराध दर में भी वृद्धि दर्ज की जा रही है।
‘दी इकोनॉमिक्स टाइम्स’ में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2014 में नशीले पदार्थों के नशे की लत और नशे की वजह से भारत में 3,647 आत्महत्याएं दर्ज की गईं। इसके साथ ही हिंदुस्तान टाइम्स में छपे लेख के अनुसार“भारत में पिछले दस सालों में नशीली दवाओं के सेवन की लत से सम्बंधित समस्याओं से कम से कम 25,426लोगआत्महत्या कर चुके हैं| यानी हर साल औसतन 2,542 आत्महत्याएं, 211 प्रति माह और 7 प्रति दिन तक होती हैं”।
पूरे भारत से अधिकतर युवा अच्छी नौकरी और शिक्षा के लिए दिल्ली आते हैं| मेरे ज़ेहन में अक्सर ये सवाल आता है कि आज का युवा नशे का आदि क्यों होता जा रहा है??, क्या इसको रोकने का कोई तरीका नही है??, इसको रोकने के लिए हमारी शासन और प्रशासन व्यवस्था कितनी सफल है??
“दिल्ली स्टेट एड्स कन्ट्रोल सोसाइटी” के सर्वेक्षण के आनुसार 23,240 बेघर बच्चे पिछले एक साल से नशे का सेवन कर रहें हैं| महिला एवं बाल विकास विभाग के 2016 के सर्वेक्षण के आनुसार दिल्ली में 70,000 बच्चे नशे के आदि हैं|
पूर्वोत्तर दिल्ली के सीमापुरी के निवासियों के बीच नशीली दवाईयों का उपयोग बढ़ रहा है जिसके चलते बस्ती के अधिकतर बच्चे नशे का सेवन करते हैं|
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 दिसंबर 2014 को अपने रेडियो कार्यक्रम “मन कि बात” में नशीली दवाईयों के दुरूपयोग की समस्या से निपटने के लिए लोगों और गैर-सरकारी संगठनों के विचार आमंत्रित किए थे| उन्होंने कहा था कि “ युवा देश कि संपत्ति हैं और राष्ट्र उन्हें नशीली दवाओं के दुरूपयोग में गिरने का जोखिम नही उठा सकता|” और यह भी कहा कि “समाज और सरकार को इस समस्या से लड़ने के लिए एक साथ मिलकर काम करना होगा और समाधान कि मांग करने वालो की सहायता के लिए जल्द ही एक हेल्पलाइन स्थापित की जाएगी|”
इस संबंध में सरकार ने टोल फ्री हेल्पलाइन नम्बर-1800110031 जारी किया है| यह नम्बर नशे से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए है, जिस पर नशे से प्रभावित व्यक्ति या उनके परिजन सम्पर्क कर सकते हैं| जहाँ उनकी समस्या सुनी जाती है और उनकी काउंसलिंग की जाती है जिसमे उन्हें नशे के दुष्प्रभावों के बारे में बताया जाता है साथ ही उन्हें नशा मुक्ति केन्द्र के बारे में जानकारी दी जाती है| जहाँ दिल्ली सरकार द्वारा मुफ्त में उपचार भी किया जाता है। इस हेल्पलाइन पर नशे की अवैध बिक्री की सूचना भी दी जा सकती है|
चरखा फीचर्स के डिप्टी एडिटर और वरिष्ट पत्रकार अनीस उर रहमान खान के अनुसार “ युवाओं का नशे की ओर रुझान का कारण उनकी सही देखभाल न होना है| जिसके लिए खुद वो और उनके अभिभावक जिम्मेदार हैं जो दिल्ली जैसे शहरों में अधिक पैसे और शोहरत कमाने के चक्कर में अपने बच्चों को समय नही देते। जिससे उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें सही गलत का अंतर नही पता चलता और बच्चे भटक जाते हैं। अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए नशे का सहारा लेते हैं| इसलिए इन बच्चों को सही रास्ते पर लाने के लिए उन्हें खुद अपनी जिन्दगी का महत्व जानना होगा और उनके माता पिता और शिक्षकों की भी जिम्मेदारी बनती है कि उन पर ध्यान दें और उन्हें नशे जैसी बुराइयों से दूर रखें|”
देश के प्रधानमंत्री से लेकर आम व्यक्ति तक इस बात को जानता है कि नशे से विनाश होता है| बीड़ी, सिगरेट खतरनाक है यह चेतावनी पैकेट पर साफ-साफ़ शब्दों में लिखा होता है परंतु उसी पैकेट से बीड़ी, सिगरेट निकालकर धूम्रपान का आनंद लिया जाता है| अब सवाल यह उठता है कि आखिर प्रशासन करे तो करे क्या ??? सोचने का विषय है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर कानून से ज्यादा समाज को बदलाव कि जरूरत है? सच है कि राज्य बिहार में सरकार ने शराबबंदी की जिसके कारण कई लोगो के जीवन में बदलाव आया लेकिन सीगरेट और गुटका तथा अन्य नशीली वस्तुओं का सेवन अब भी जारी है। मतलब साफ है जबतक हम स्वंय अपने जीवन का मूल्य नही समझेंगे नशे की आदत से कोई कानून हमें नही बचा सकता। चाहे नशा किसी भी प्रकार का क्यों न हो।
-चरखा फीचर्स

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