कटघोरा वनमंडल परिषर में ठेकेदार ने की थी आत्मदाह की कोशिश, पुलिस ने किया था मामला दर्ज..

महिला डीएफओ की कार्यशैली को लेकर कोई बड़ी साजिश तो नही,जो नित नए कारनामे सामने आ रहे।

कटघोरा. बीते शुक्रवार को कटघोरा वनमंडल से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई थी,जिसमे एक स्थानीय ठेकेदार ने स्वयं पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह करने की नाकाम कोशिश की थी।बताया जा रहा है कि जिस वक्त यह घटना हुई उस दौरान डीएफओ शमा फारूकी भी परिषर में मौजूद थी।ठेकेदार द्वारा की गई यह वाहियात हरकत अपने आप मे शर्मसार कर देने के साथ बेहद भयावह थी,इस घटना से पूरे वन महकमे के पांव तले जमीन खिसक गई थी,मौके पर मौजूद लोगों ने स्थिति संभाली अन्यथा यह वाक्या बेहद गम्भीर परिणाम बया कर सकता था,वन अधिकारियों के जान पर बन आई थी।मौके पर उपस्थित महिला वनमंडलाधिकारी भी हक्का बक्का रह गई थी।आनन फानन में स्थानीय पुलिस को सूचना प्रेषित की गई लिहाजा पुलिस ने मामले की गम्भीरता को समझते हुए तत्काल मोर्चा संभाला।

ठेकेदार अपने जगह कितना सही था यह कह पाना बड़ा मुश्किल होगा, पर इसकी हरकते बेहद वाहियात होने के साथ गम्भीर परिणाम बया करने लायक थी।जो कि कहीं से भी जायज ठहराने योग्य नही थी।अपनी मांगों को पूरा करवाने यह तरीका दुसरो को जलील करने का जरिया मात्र हो सकती है।इंसान इस तरह की स्पंदन केवल पागलपन में या मानसिक रूप से पीड़ित होने पर ही कर सकता है,जो उसकी कुंठित मानसिकता को स्पष्ट करता है,जब कोई स्वस्थ इंसान ऐसा करे तो उसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जिस वजह से वह आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर हो जाता है।अगर वनमंडल के घटना की बात करे तो ठेकेदार अपने भुगतान को लेकर काफी तनाव में तथा मानसिकरुप से व्यथित चल रहा था।इसके अनुसार वनमंडलाधिकारी इनका भुगतान नही कर रही थी,अगर वास्तविक स्थिति में जाया जाए तो भुगतान नही होने का कारण संबंधित रेंजर होगा जो अपने दायित्वों का निर्वहन न कर लापवाही में लीन था।

भुगतान नही होने से ठेकेदार ने उठाया था आत्मदाह का कदम

वर्ष 2019 के दौरान ठेकेदार अभय गर्ग ने जड़गा वनपरिक्षेञ में तालाब व स्टॉप डेम का कार्य किया था,कार्य पूर्ण होने के बावजूद आजपर्यंत तक भुगतान नही हुआ था।ठेकेदार अनुसार कई बार विभाग को भुगतान के संबंध अवगत कराया गया।दो सालों से अपना मेहनताना व मशीनों का किराया पाने के लिए ठेकेदार ने चप्पल घिस डाली।लिहाजा ठेकेदार ने तंग आकर वनमंडलाधिकारी के नाम दिनांक 26/08/2021 को पत्र प्रेषित कर भुगतान के लिए गुहार लगाई गई थी जिसमें जिक्र था कि विभाग द्वारा तत्काल भुगतान नही किया जाएगा तो मेरे द्वारा अवांछित कदम उठाया जाएगा जिसके जिम्मेदार वनमंडल के सम्बंधित अधिकारी व रेंजर होंगे।

ठेकेदार ने हताश होकर अपनी इहलीला समाप्त करने की मंशा से वनमंडल परिषर में दाखिल हुआ और वनमंडलाधिकारी के समक्ष आत्मघाती कदम उठा लिया। घटना के दूसरे दिन ठेकेदार अभय गर्ग व अक्षय गर्ग (बड़ा भाई) के ऊपर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले को संज्ञान में ले लिया।

महिला डीएफओ को लेकर कंही कोई बड़ी साजिश तो नही?

तात्कालीन डीएफओ डी डी संत साहब के रवानगी पश्चात फरवरी 2019 को आईएफएस शमा फारूकी ने कटघोरा वनमंडल का कार्यभार संभाला।जिस तरह के बदइंतजामी हालात वनमंडल के थे उन्हें शमा फारूकी की आमद ने सुव्यवस्थित कर डाला।अपनी सेवा के दौरान इन्होंने फील्डवर्क व ऑफिस वर्क पूरे यथार्थता से निभाये हैं।लाग डाउन के दौरान भी इनके बुलंद हौसलों ने विभागीय कार्यो में रुकावट नही आने दी।फारूकी के तेजतर्रार होने के नाते कई विभागीय अफसर व कर्मचारी दांतो तले उंगली दबाए बैठे थे।उन्हें अंदेशा था कंही हमारे भ्रष्ट कार्यो की पोल ना खुल जाए।जब ठेकेदारो ने भुगतान को लेकर रोना शुरू किया तो वनपरिक्षेञ अधिकारियों के माथे पर पसीना शुरू हो गया।आपको बता दे कि हम बात कर रहे हैं वनपरिक्षेञ जड़गा की जहां तात्कालिन रेंजर द्वारा करोड़ो रूपये के निर्माणकार्य कराए गए थे।इन निर्माण कार्यो का जिम्मा स्थानीय ठेकेदारो ने उठाया था और इन्होंने गुणवत्ताविहीन कार्य कर विभाग पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया था।जिनका भुगतान करना किसी भी डीएफओ के लिए आसान कार्य नही था,लिहाजा डीएफओ शमा फारूकी ने सभी कार्यो की जांच उपरांत भुगतान करना तय किया था।इस बीच जो कार्य सही थे जिनका बिल व्हाउचर लगा था उन्हें भुगतान का शिलशिला शुरू हुआ।इस बीच ठेकेदारो को चुभन होना लाजमी था दरअसल जिन ठेकेदारो ने कार्य किया था उन्हें विभाग से कोई वर्क आर्डर जारी नही था वे तो केवल तात्कालिन रेंजर के दिग्ददर्शन में कार्य कर रहे थे जिसमें कमीशन का बड़ा खेल था।लिहाजा विभाग के समक्ष ठेकेदारो के भुगतान का माजरा खड़ा हो गया।आखिर विभाग इन्हें किस आधार पर भुगतान करें।

महिला डीएफओ शमा फारूकी कई मर्तबा अनगर्ल आरोपो का शिकार हो चुकी हैं लगातार तथ्यहीन आरोप इनकी कार्यशैली पर आमादा रहे हैं।इस बार ठेकेदार द्वारा वनमंडल परिसर में आत्मघाती कदम उठाना सहर्ष ही नही हो सकता,इसके पीछे जरूर किसी षड़यंत्रकारी का हाथ हो सकता है?जिन्हें लगता है कि ऐसे कृत्यों से डीएफओ शमा फारूकी की छवि धूमिल होगी और इन्हें यहाँ से रवाना कर दिया जाएगा।पुरानी कहावत है “साँच को,आंच नही” कहने का तात्पर्य यह है कि ठेकेदार जिस भुगतान को लेकर इस तरह के कृत्य अपना रहे हैं उसमें डीएफओ दोषी नही हो सकता, इसके जिम्मेदार तो तात्कालिन आला अधिकारी है जिनका ये सब किया धरा है।जबकि इन बातों का जिक्र जैसे ही वर्तमान डीएफओ के संज्ञान में आया इन्होंने तत्काल रेंजरों को कड़ी फटकार लगाते हुए शोकाज नोटिस जारी कर व्यवस्थाओ में सुधार करने का कार्य किया है।

नगर में दबी जुबा यह चर्चा भी है कि ठेकेदार को ऐसा वाहियात कदम नही उठाना था भुगतान पाने के नियमतः हजारों तरीके होते हैं यह कदम सीधे अधिकारियों को फसाने का जरिया मात्र था लेकिन वनमंडल में पदस्थ डीएफओ ने मोके की नजाकत को भांप सटीक निर्णय लेते हुए अपने मातहतों को इस षडयंत्र रूपी कारनामे का हिस्सा बनने से बचा लिया।

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