लड़की का पहचान पत्र मांगने पर हुआ विवाद , मेजर लीतुल गोगोई के नाम पर था कमरा

नई दिल्ली : जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मेजर लीतुल गोगोई, जिन्होंने पिछले साल बडगाम में पत्थरबाजों से बचाव के लिए एक आम नागरिक को आर्मी की जीप के बोनट पर बांधकर दर्जनों गांवों में घुमाया था, से बुधवार को एक स्थानीय महिला और व्यक्ति के साथ श्रीनगर के एक होटल में पाए जाने को लेकर पूछताछ की.

मेजर गोगोई एक युवती के साथ होटल में घुसना चाहते थे. होटल स्टाफ ने युवती के साथ घुसने की अनुमति नहीं दी. इस पर वहां झगड़ा हो गया. पुलिस ने गोगोई से पुलिस स्टेशन में पूछताछ की, हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया. कश्मीर के आईजीपी एसपी पाणि ने मामले में जांच के आदेश दिए हैं और एसपी नॉर्थ सिटी सज्जाद अहमद शाह को जांच अधिकारी नियुक्त किया है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक शाह ने कहा कि वे इस बारे में विस्तृत जांच कर रहे हैं. अभी तक की कहानी ये है कि लीतुल गोगोई के नाम पर होटल में एक कमरा बुक था. एक जोड़ा होटल आया, लेकिन उसे अंदर नहीं जाने दिया गया. होटल के स्टाफ ने कहा कि वे एक स्थानीय महिला को अंदर जाने की इजाजत नहीं दे सकते.’

उन्होंने कहा, ‘इसके बाद रिसेप्शन पर ही झड़प हो गई. होटल के स्टाफ ने तुरंत पुलिस को बुलाया. इसके बाद आई पुलिस पार्टी गोगोई, स्थानीय महिला और व्यक्ति को अपने साथ पुलिस स्टेशन ले गई. पुलिस ने बाद में बताया- जांच में हमें कुछ नहीं मिला. लड़की बालिग है और उसकी उम्र 18 या 19 के आसपास है. हमने पूरी जांच की और उन्हें जाने दिया.’

पुलिस ने कहा कि मेजर गोगोई को उनकी यूनिट को सौंप दिया गया है. पुलिस के बयान में कहा गया है कि बडगाम की एक महिला और समीर अहमद नाम का व्यक्ति मिलने आए थे, लेकिन होटल के स्टाफ ने उन्हें मिलने नहीं दिया. इस बीच पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई और सभी को पुलिस स्टेशन ले गई.

‘हालांकि बाद में पता चला कि स्थानीय महिला एक आर्मी ऑफिसर से मिलने के लिए आई थी. पुलिस ने आर्मी ऑफिसर के बारे में पूरी जानकारी ली. और उनका बयान दर्ज करने के बाद उन्हें आर्मी की यूनिट को सौंप दिया. मामले की जांच के लिए महिला के बयान को भी दर्ज किया गया.’

होटल के मालिक ने कहा कि मेजर के साथ स्थानीय महिला को देखकर उन्होंने बुकिंग से इनकार कर दिया. होटल ग्रैंड ममता के एजाज अहमद चाशू ने कहा, ‘बुधवार की सुबह, बुकिंग डॉट कॉम से हमें ऑनलाइन बुकिंग मिली थी. बुकिंग लीतुल गोगोई के नाम से थी, जो कि एक रात के लिए दो गेस्ट की खातिर की गई थी.’

अपनी ऑनलाइन बुकिंग में, मेजर गोगोई ने कहा था, ‘मैं बिजनेस के सिलसिले में यात्रा कर रहा हूं और हो सकता है कि बिजनेस क्रेडिट कार्ड का उपयोग करूं.’

उन्होंने कहा, ‘रिसेप्शन पर हमने उनसे पहचान पत्र मांगा, तो गोगोई ने अपना ड्राइविंग लाइसेंस दिया. महिला पहले तो अपना पहचान पत्र देने में हिचकिचा रही थी, लेकिन फिर आधार कार्ड दिया, जिस पर बडगाम का पता लिखा था. हमने महसूस किया कि लड़की स्थानीय है और नाबालिग दिख रही थी. आधार कार्ड पर जन्मदिन का वर्ष 2001 लिखा हुआ था, हमने उन्हें बताया कि हमारी पॉलिसी के मुताबिक स्थानीय लोगों को हम होटल की सुविधा नहीं देते हैं, खासतौर पर तब जब एक लड़का और लड़की हों.’

अहमद ने कहा कि जब होटल का स्टाफ मेजर गोगोई की कार में सामान वापस रखने गया, तो कार का ड्राइवर उनके साथ उलझ पड़ा और मारपीट की. उन्होंने कहा, ‘वे (गोगोई) वापस लौट गए और जब हम उनका सामान कार (गोगोई काले रंग की ऑल्टो कार में कश्मीरी ड्राइवर के साथ होटल पहुंचे थे) में रखने गए तो उन्होंने ड्राइवर से कहा कि हमने उनको बेइज्जत किया है.

ड्राइवर कार से बाहर निकलकर आया और होटल के रिलेशनशिप मैनेजर पर चिल्लाने और मारपीट करने लगा. इसके बाद हमने पुलिस को बुलाया.’ पुलिस ने ड्राइवर की पहचान समीर अहमद के रूप में की है, जोकि बडगाम का निवासी है.

बता दें कि पिछले साल बडगाम उपचुनाव के समय मेजर गोगोई ने एक स्थानीय नागरिक फारूक अहमद डार को आर्मी की जीप के बोनट पर बांधकर बडगाम के दर्जनों गांवों में घुमाया था. मेजर द्वारा डार को इस तरह मानव ढाल बनाए जाने को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर उनकी खूब आलोचना हुई, लेकिन आर्मी ने उनका समर्थन किया और मेडल से नवाजा.

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