देश की पहली दृष्टिहीन महिला IAS अधिकारी ने संभाली सब-कलेक्टर का पद

प्रांजल ने 6 साल की उम्र में खो दी थी आंखों की रोशनी

केरल:देश की पहली दृष्टिहीन महिला IAS अधिकारी ने सब-कलेक्टर का पद संभाल ली है। जी हाँ हम बात कर रहे हैं महाराष्ट्र के उल्लास नगर की रहने वाली प्रांजल पाटिल की। जिन्होने केरल के तिरुवंतपुरम जिले के सब-कलेक्टर की जिम्मेदारी संभाल ली।

प्रांजल ने 6 साल की उम्र में आंखों की रोशनी खो दी थी। लेकिन, फिर भी वो अंधेरी दुनिया में भटकने के बजाय तमाम झंझावातों को पार करके IAS बनीं। 30 साल की प्रांजल ने 2017 में अपनी रैंक में सुधार किया और 124वीं रैंक हासिल की।

जेएनयू से पढ़ाई की :

प्रांजल के माता-पिता ने कभी भी उनकी नेत्रहीनता को उनकी शिक्षा के बीच आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने मुंबई के दादर में स्थित नेत्रहीनों के स्कूल में प्रांजल का दाखिला कराया। प्रांजल ने 10वीं और 12वीं की परीक्षा भी बहुत अच्छे अंकों से उत्तीर्ण की और 12वीं में चाँदीबाई कॉलेज में कला संकाय में प्रथम स्थान प्राप्त किया।

उन्होंने जवाहर लाल विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय पर परास्नातक किया। फिर पीएचडी और एमफिल किया। वह कहती हैं कि वहां हर किसी में समाज के लिए कुछ करने जा जज्बा था, जिससे प्रभावित होकर उन्होंने सिविल सेवा में जाने का फैसला किया।

पढ़ाई के प्रति उनकी लगन के कारण ही 2016 में सिविल सर्विस की परीक्षा पहले ही कोशिश में पास कर ली थी। प्रांजल ने सिविल सर्विस की परीक्षा में 773वां रैंक हासिल की हैं। तब उन्हें भारतीय रेलवे खाता सेवा में नौकरी का प्रस्ताव मिला लेकिन दृष्टिहीनता के कारण उन्हें नौकरी नहीं दी गई।

वे बेहद निराश थीं लेकिन उन्होंने हार मानने की जगह दोबारा प्रयास करने की ठानी। अगले साल वह 124वीं रैंक लेकर आईं और उनकी सफलता ने सभी पूर्वागृहों को जवाब दे दिया। उन्हें प्रशिक्षण अवधि के दौरान एर्नाकुलम सहायक कलेक्टर नियुक्त किया गया था।

कैसे की यूपीएससी की तैयारी ?…

बता दें कि प्रांजल की पढ़ाई ब्रेल लिपि में हुई है। इसके बावजूद भी वह पढ़ने से पीछे नहीं हटी और अपनी पढ़ाई पूरी की। बता दें कि उन्होंने बीए सेंट जेवियर कॉलेज से की है। बीए के बाद वह आगे पढ़ने के लिए दिल्ली आई और जेएनयू में भर्ती हुई।

जेएनयू से एमए करने के बाद वह सिविल सर्विस की तैयारियों में लग गई। बता दें कि उनकी इस तैयारी में एक सॉफ्टवेयर जॉब ऐक्सेस विद स्पीच ने उनकी खूब मदद की जिसके कारण वह परीक्षा निकालने में सफल रही।

उन्हें नई-नई चीज़ों के बारे में पढ़ना पसंद था. इसीलिए प्रांजल ने IAS की तैयारी को अपना लक्ष्य बनाया। उन्हें लोग ये भी कहते थे कि जब दिखता नहीं है तो इतना क्यों पढ़ती हो लेकिन उन्होंने अपनी रीडिंग हेबिट को पहले की तुलना में और ज्यादा डेवलेप किया.

उन्होंने दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय जेएनयू से भी पीएचडी भी की है। प्रांजल ने 2017 में केरल की एरनाकुलम के उप कलेक्‍टर के रूप में अपने प्रशासनिक करियर की शुरुआत की थी. प्रांजल अपनी कामयाबी का श्रेय माता-पिता के अलावा अपने पति को भी देती हैं।

उन्होंने कहा था कि अवसर के दरवाजे सभी के लिए खुले होने चाहिए और शारीरिक सीमाओं तक सीमित नहीं होने चाहिये…उन्होंने दूसरे प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा में 124 वां स्थान हासिल किया।

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