सद्भावना समारोह में ब्रह्माकुमारी कमला दीदी बोली-यह सृष्टि परिवर्तन की बेला है

शान्ति सरोवर में सद्भावना समारोह का हुआ आयोजन

रायपुर: ब्रह्माकुमारी कमला दीदी ने कहा कि यह सृष्टि परिवर्तन की बेला है। इस समय विश्व इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण समय संधिकाल अथवा संगमयुग चल रहा है। जबकि निराकार परमपिता परमात्मा अपने साकार माध्यम प्रजापिता ब्रह्मा के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान और राजयोग की शिक्षा देकर संस्कार परिवर्तन और नई सतोप्रधान दुनिया की पुर्नस्थापना करा रहे हैं।

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी कमला दीदी आज इस संस्थान के संस्थापक पिताश्री प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की ५० वीं पुण्यतिथि पर शान्ति सरोवर में आयोजित सद्भावना समारोह में अपने विचार रख रही थीं। उन्होंने कहा कि प्रजापिता ब्रह्मा को इस संस्थान में परमात्मा, भगवान अथवा गुरु का दर्जा नहीं दिया जाता है। अपितु वह भी एक इन्सान थे जिन्होंने नारी शक्ति को आगे कर ईश्वरीय सेवा के द्वारा महिला सशक्तिकरण का कार्य किया। उन दिनों समाज में महिलाओं की स्थिति दोयम दर्जे की थी किन्तु ब्रह्माबाबा ने उनमें छिपी नैतिक और आध्यात्मिक शक्तियों को सामने लाकर विश्व में एक नई शुरुआत की।

उन्होंने वैश्विक बदलाव की चर्चा करते हुए कहा कि जब सृष्टि प्रारम्भ हुई तो सतोप्रधान थी। उस समय यह दैवभूमि कहलाती थी। सभी प्राणी मात्र दैवी गुणों से सम्पन्न होने के कारण देवी और देवता कहलाते थे। चहुं ओर सुख शान्ति व्याप्त थी। किन्तु द्वापर युग से समाज में नैतिक पतन होने से दु:ख-अशान्ति की शुरुआत हुई। तब विभिन्न धर्म पैगम्बरों ने अपने-अपने धर्मों की शिक्षा देकर नैतिक और सामाजिक गिरावट को रोकने का कार्य किया। इससे अधोपतन की गति में कमी जरुर आयी लेकिन पूरी तरह से उस पर रोक नही लग सकी।

कमला दीदी ने कहा कि आज विश्व में भौतिक चकाचौंध बहुत है लेकिन दु:ख, अशान्ति, तनाव, बिमारी आदि की भी कमी नहीं है। अब यह सृष्टि इतनी पुरानी और जर्जर हो चुकी है कि इसका विनाश ही एकमात्र समाधान है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय न तो राजनीतिक नेता विश्व का उद्घार कर सकते हैं, न ही कोई वैज्ञानिक अथवा धार्मिक नेता ही यह कार्य करने में सक्षम हैं। यह परमपिता परमात्मा का कार्य है। जो कि वह वर्तमान संगमयुग पर आकर कर रहे हैं।

ब्रह्मा बाबा महामानव थे जिन्होंने समाज को निर्विकारी बनने के लिए प्रेरित किया: डॉ. मानसिंह परमार

कुशाभाउ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मानसिंह परमार ने कहा कि ब्रह्मा बाबा एक महामानव थे जिन्होंने समाज को सदाचार के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। आजकल दुनिया में चारों ओर अशान्ति का महौल है। प्रतिस्पर्धा का जमाना है। ऐसे समय पर उन्होंने लोगों को काम, कोध, लोभ, मोह और अहंकार को छोड़कर निर्विकारी पवित्र और राजयोगी बनने का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने नारी शक्ति को आगे करके महिला सशक्तिकरण का अनोखा उदाहरण प्रस्तुत किया। आज यह संस्था विश्व के एक सौ तीस देशों में नौ हजार से अधिक सेवाकेन्द्रों के माध्यम से सफलतापूर्वक अपनी सेवाएं दे रही है।

उन्होंने बतलाया कि पहले उन्हें गुस्सा बहुत आता था किन्तु राजयोग मेडिटेशन से उन्हें इस पर नियंत्रण प्राप्त करने में सफलता मिली।इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी अदिति बहन ने कहा कि वर्तमान संसार में कोई सार नहीं बचा है। जीवन में दिनों-दिन बढ़ रही चिन्ता, तनाव, दु:ख और अशान्ति ने समाज को नर्कतुल्य बना दिया है। ऐसे समय प्रजापिता ब्रह्मा बाबा ने आध्यात्मिक ज्ञान और राजयोग के द्वारा समाज को एक नई राह दिखाई है। समारोह का संचालन ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी ने किया।

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