शाही स्नान की डुबकी लगाने अपने आचार्य संग पहुंचे श्री पंचायती आनंद अखाड़े के संत

श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के बाद अटल अखाड़े के संतों ने शाही स्नान किया

प्रयागराज: संगम किनारे जमे श्रद्धालुओं ने 12 बजे रात के बाद से ही स्नान शुरू कर दिया और इसी के साथ आस्था के महाकुंभ का आगाज हो गया। श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा और तोपोनिधि श्री पंचायती आनंद अखाड़े के संत मकर संक्रांति पर पहले शाही स्नान की डुबकी लगाने के लिए अपने आचार्य, महामंडलेश्वर और ईष्ट देव के साथ संगम तट पर पहुंच चुके हैं।

श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के बाद अटल अखाड़े के संतों ने शाही स्नान किया। दोनों अखाड़ों का स्नान पूरा हो चुका है। दोनों अखाड़ों के संत अपने शिविर की ओर प्रस्थान कर रहे हैं।

आचार्य महामंडलेश्वर और साधु-संतों ने किया स्नान

मकर संक्रांति पर मंगलवार को पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी ने सबसे पहले डुबकी लगाई। परंपरा के मुताबिक सबसे पहले अखाड़े के भालादेव ने स्नान किया। उसके बाद नागा साधुओं ने फिर आचार्य महामंडलेश्वर और साधु-संतों ने स्नान किया।

और तय समय के मुताबिक पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के संतों ने सबसे पहले संगम तट पर डुबकी लगाई… महानिर्वाणी अखाड़े के बाद श्री पंचायती अटल अखाड़े के संत, आचार्य और महामंडलेश्वर संगम तट पर शाही अंदाज में पहुंचे।

शाही स्नान के लिए सबसे पहले संगम तट पर श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी का जुलूस पहुंच चुका है। अखाड़े के देव भगवान कपिल देव तथा नागा संन्यासियों ने अखाड़े की अगुवाई की।

शाही स्नान के लिए संन्यासी के अखाड़े

शाही स्नान के लिए संन्यासी के अखाड़े निकल चुके हैं। पहले स्नान के लिए महानिर्वाणी अखाड़े के संत, अचार्य और महामंडलेश्वर शाही अंदाज में रथों पर विराजमान होकर संगम तट की ओर बढ़ रहे हैं। इनके साथ चल रहा नागा साधुओं का कारवां लोगों की आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

मंगलवार को ही पहला शाही स्नान है। सभी तेरह अखाड़ों को तीन वर्गों में बांटा गया है। सन्यासी, बैरागी और उदासीन। सबसे पहले सन्यासी अखाड़े के संत शाही स्नान करेंगे, इसके बाद बैरागी और अंत में उदासीन के अंतर्गत आने वाले संत शाही स्नान करेंगे।

सन्यासी अखाड़ों के संन्यासियों के शाही स्नान की शुरुआत सुबह 6.15 बजे शुरू होगी। सबसे पहले श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी और श्री पंचायती अटल अखाड़ा के संत स्नान के लिए अपने अखाड़े से 5.15 बजे प्रस्थान करेंगे।

इन अखाड़ों के संन्यासियों को 6.15 बजे शाही घाट पहुंचना होगा। 40 मिनट के भीतर स्नान करके संन्यासियों को 6.55 बजे लौटना होगा। इसके बाद 7.55 बजे तक इन अखाड़ों के संतों,अचार्यों और महामंडलेश्वरों को अपने शिविर में पहुंचना है।

आवाहन अखाड़े के संत करेंगे शाही स्नान

इसके बाद सुबह 7.05 बजे निरंजनी एवं आनंद अखाड़े के संन्यासी शाही घाट पर पहुंचेंगे। उन्हें भी 40 मिनट में स्नान करके 7.45 बजे लौटना होगा। तीसरे नंबर पर जूना, अग्नि और आवाहन अखाड़े के संत शाही स्नान करेंगे। इन्हें सुबह आठ बजे शाही घाट पर पहुंचना होगा और 40 मिनट में स्नान करके 8.40 बजे घाट प्रस्थान करना होगा।

इसके बाद बैरागी अखाड़ों के अंतर्गत आने वाले अखाडों के संत शाही स्नान करेंगे। इसमें अनी अखाड़ों के तीनों अखाड़ों में से सबसे पहले पंच निर्मोही अनी अखाड़ा 10.40 बजे घाट पर पहुंचेंगे। इन्हें आधे घंटे का समय दिया गया है।

इसके बाद दिगंबर अनी अखाड़ा के संत 11.20 बजे शाही स्नान को पहुंचेंगे। इन्हें 50 मिनट का समय दिया गया है। वहीं पंच निर्वाणी अनी अखाड़ा को घाट पर 12.20 बजे पहुंचना है। इनके संतों के लिए भी आधे घंटे का ही समय दिया गया है।

अंत में उदासीन अखाड़े के संत शाही स्नान करेंगे, लेकिन बड़ी बात यह है कि उदासीन के संतों को स्नान के लिए सबसे अधिक एक घंटे का समय दिया गया है।

वहीं सबसे बड़े जूना अखाड़ों को शाही स्नान के लिए सिर्फ 40 मिनट का समय दिया गया है। जूना अखाड़े के हजारों नागा संन्यासियों को इस समय सीमा में डुबकी लगाकर लौटना पड़ेगा। इतने ही समय में संन्यासियों को घाट भी खाली करना पड़ेगा क्योंकि जूना के बाद बैरागी संतों को स्नान करना है।

बैरागी संतों की संख्या भी एक लाख से ऊपर है। इतने कम समय में जूना अखाड़े के संन्यासियों का स्नान कराना प्रशासन के लिए चुनौती है। बता दें कि जूना अखाड़े के शाही स्नान को देखने के लिए श्रद्धालुओं में सबसे ज्यादा उत्सुकता है। जूना अखाड़े में किन्नर अखाड़े के शामिल होने से लोगों में उत्सुकता और बढ़ गया है।

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