हिन्दी विद्वानों के वंशज अंग्रेजी के पक्षधर – रिजवी

रायपुर: जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के मीडिया प्रमुख एवं पूर्व उपमहापौर इकबाल अहमद रिजवी ने विश्व हिन्दी दिवस जोर-शोर से मनाये जाने पर खुशी जाहिर की है तथा कहा है कि हिन्दी हमारी राष्ट्र भाषा है जिसे देशवासियों की मातृभाषा कहना न्याय संगत होगा। हिन्दी भाषा के ज्यादातर विद्वान हिन्दी भाषा के उत्थान एवं उसको विलोपित होने से बचाने सतत् प्रयासरत है।

हिन्दी की दैयनीय स्थिति दक्षिण भारत में स्पष्ट दिखलाई देती है। इसे विडम्बना ही कहा जायेगा कि दक्षिण भारत के कई प्रदेशों मे हिन्दी भाषा में बात करने पर वहां के क्षेत्रीय भाषा के पक्षधर लोग जवाब ही नही देते है। हिन्दी उनके लिए मानों अनजान भाषा है या फिर जानते हुए भी अपनी क्षेत्रीय भाषा को तरजीह देने ऐसा गैरवाजिब कदम उठाते है। अंग्रेज देश छोड़कर चले गये परन्तु अंग्रेजियत यही छोड़ गये है। इस मानसिकता से निजात पाना आवश्यक है तभी हम हिन्दी को उसका सही एवं उपयुक्त स्थान दिला सकेगें।

रिजवी ने कहा है कि देश में हिन्दी भाषा बोलने व पढ़ने वालो की संख्या घटती जा रही है। हिन्दी भाषाविद् एवं विद्वानो की संतान अंग्रेजी मीडियम के स्कूलों मे ही पढ़ते है। अंग्रेजी में बात करना आज समाज में फैशन एवं स्टेट्स सिम्बाल बन चुका है जो जंगल की आग की तरह फैलते ही जा रहा है। हिन्दी के वर्चस्व को पूर्ववत् बनाए रखने सरकार को कारगर कदम तत्काल उठाना अनिवार्य है वरन् उर्दू के समान कुछ अन्य भाषाओं जैसे हिन्दी भाषा को भी विलुप्त होते देर नही लगेगी।

इस दिशा में हिन्दी के उत्थान एवं बढ़ावा देने हिन्दी भाषी विद्वानो का सुझाव एवं सहयोग लेना आवश्यक है। बुरे दौर से गुजर रही हिन्दी भाषा पर तंज करते हुए एक शायर ने कहा है कि-’’सब मेरे चाहने वाले है लेकिन मेरा कोई नही, मैं इस मुल्क मे उर्दू की तरह रहता हूं। हिन्दी भाषा को अपनी पहचान समझना प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है तथापि हिन्दी को जीवित रखना हमारा परम दायित्व भी है।

Tags
Back to top button