किसी भी मौसम में दुश्मन को ढेर कर देगी यह ‘देसी बोफोर्स’

जबलपुर : मध्य प्रदेश के जबलपुर में स्थित गैन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) में पहली बार स्वदेशी तकनीकी से बनी छह धनुष तोप मंगलवार को सेना के हवाले कर दी गई। इस स्वदेशी धनुष तोप के सेना में शामिल होने से आर्टिलरी गन के लिए भारत अब दूसरे देश पर निर्भर नहीं रहेगा। जीसीएफ को सेना ने 114 धनुष तोप का ऑर्डर दिया है।

सेना को धनुष तोप सौंपते समय सचिव रक्षा (उत्पादन) डॉ. अजय कुमार ने कहा कि सुरक्षा निर्माणी जीसीएफ के 115 साल के इतिहास को साक्षी मानकर कहता हूं कि ‘धनुष’ तोप इस निर्माणी की सबसे बड़ी उपलब्धि है। भारतीय सेना के सहयोग से यह आर्टिलरी गन बनाने का काम पूरा हुआ है। धनुष तोप की पहली खेप सेना को सौंपने का कार्यक्रम गन कैरिज फैक्ट्री में हो रहा है, लेकिन उसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है।

कार्यक्रम में आयुध निर्माणी बोर्ड के अध्यक्ष एवं महानिदेशक सौरभ कुमार, थलसेना के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल पीके श्रीवास्तव, आर्टिलरी स्कूल के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल आरएस सलारिया वीएसएम, मेजर जनरल मनमीत सिंह, एमजी आर्टिलरी हेड क्वार्टर पश्चिमी कमान चंडी मंदिर भी शामिल रहे।

ये हैं इसकी खूबियां
वजन – 13 टन से कम
मारक क्षमता – 38 किलोमीटर
फायर क्षमता – एक मिनट में छह बार
संचालन – पूरी तरह ऑटोमेटिक
कीमत – लगभग 18 करोड़
मौसम – किसी भी मौसम का तोप पर कोई असर नहीं होता।
तैनाती – यह तोप किसी भी स्थान पर तैनात की जा सकती है
ग्राउंड क्लीयरेंस – 400 एमएम के हाई ग्राउंड क्लीयरेंस
एलिवेशन की रेंज – माइनस तीन डिग्री से 70 डिग्री तक

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