धर्म/अध्यात्म

संगत का असर हमारे जीवन पर सबसे ज्यादा असर डालता है

इंसान किस किस्म की संगत रखता है, उसका बहुत बड़ा असर इंसान के ऊपर होता है

संगत का असर हमारे जीवन पर सबसे ज्यादा असर डालता है

इंसान किस किस्म की संगत रखता है, उसका बहुत बड़ा असर इंसान के ऊपर होता है. ज़िंदगी में कई बार ऐसी घटनाएं होती हैं जिनमें हम देखते हैं कि एक ही घराने के बच्चे जब अलग-अलग माहौल में जी रहे होते हैं, तो उनका चरित्र, उनके बातचीत करने का तरीका, उनके ख़यालात, सब अलग-अलग होने शरू हो जाते हैं.

महापुरुष हमें समझाते हैं कि हम अच्छी संगत रखें. दोस्ती उन लोगों से करें जिनके ख़यालात शुद्ध हों. महापुरुष हमें बार-बार समझाते हैं कि हम अपनी संगत अच्छी रखें. ऐसे लोगों के साथ जिएं, ऐसे लोगों के साथ अपना समय व्यतीत करें, जिनका ध्यान प्रभु की ओर हो. जब उनकी संगत में रहेंगे, तो हमारे विचार भी उसी किस्म के हो जाएंगे और हमारा ध्यान भी प्रभु की ओर लगता जाएगा. अगर उन लोगों की संगत की जिनका ध्यान दुनिया की ओर है, तो हमारा ध्यान भी प्रभु से हटकर उस ओर होना शुरू हो जाएगा. तो यह हम पर निर्भर करता है कि हम कैसी संगत रखें, किस से दोस्ती रखें, और किस माहौल में जिएं.

संत राजिंदर सिंह जी
कई बार इंसान सोचता है कि मैं अपना माहौल नहीं बदल सकता. लेकिन महापुरुष हमें समझाते हैं कि हम अपने साथ जुड़े पूर्व कर्मों को तो नहीं बदल सकते, परंतु हमारी पच्चीस प्रतिशत ज़िंदगी हम पर निर्भर करती है. अगर हम अच्छी तरफ़ क़दम उठाएंगे, तो प्रभु की नज़दीकी पाएंगे और अगर हमारे क़दम अच्छी ओर नहीं उठे, तो हमारी ज़िंदगी और अधिक ख़राब होती चली जाएगी. इसीलिए समझाया जाता है कि हम अपनी संगत अच्छी करें.

जब हम महापुरुषों की ज़िंदगी को देखते हैं, तो उनके अंग-संग जो माहौल होता है, उसमें ध्यान हर समय प्रभु की ओर जाता है. क्योंकि वे चाहते हैं कि हम प्रभु को जानें, हम प्रभु को पाएं, हमारी आत्मा का मिलन परमात्मा के साथ हो. हम जितना ज़्यादा ध्यान प्रभु की ओर करेंगे, उतना ही हमें उनके पास पहुंचने में आसानी होगी. जिस ओर हम ध्यान देते हैं, वैसे ही बन जाते हैं. संगत अच्छी होने से हमारा ध्यान आसानी से प्रभु की ओर लग जाता है. इसीलिए संगत अच्छी रखना बहुत ज़रूरी है.

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