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कर्नाटक उपचुनाव के नतीजों से महागठबंधन के प्रयास तेज

देशभर में छिड़ी बहस, विपक्षी दल तलाश रहे नए समीकरण

कर्नाटक उपचुनाव के नतीजों से महागठबंधन के प्रयास तेज

बेंगलुरु। कर्नाटक की तीन लोकसभा और दो विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को शानदार सफलता मिली है। इसके बाद देशभर में इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या इन नतीजों से बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन बनाने के प्रयास तेज होंगे?

दरअसल, 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के नेतृत्व में ऐंटी-बीजेपी पार्टियों खासतौर से क्षेत्रीय दलों की ओर से अलायंस बनाने की कोशिश हो रही है।

4-1 की यह जीत ऐसे समय में मिली है जब क्षेत्रीय पार्टियां खासतौर से मायावती की पार्टी बीएसपी महागठबंधन से अलग रुख अख्तियार करती दिख रही हैं। हालांकि इससे पहले मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में विपक्षी एकता देखने को मिली थी।

अभी संदेह की स्थिति

सीट शेयरिंग को लेकर मतभेदों के चलते मध्य प्रदेश में कांग्रेस और बीएसपी के बीच गठबंधन की वार्ता फेल हो गई। कांग्रेस से बड़े मतभेदों के चलते दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि अगले आम चुनावों में उनकी आम आदमी पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी। ये कुछ ऐसे घटनाक्रम हैं जो राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन की कोशिशों की संभावना पर संदेह पैदा करते हैं।

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