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साल भर पहले चुनाव आयोग ने इलेक्शन बॉन्ड पर उठाए थे सवाल, केंद्र ने कहा ऐसी कोई जानकारी नहीं

साल भर पहले चुनाव आयोग ने इलेक्शन बॉन्ड पर उठाए थे सवाल, केंद्र ने कहा ऐसी कोई जानकारी नहीं

-मई, 2017 में कानून मंत्रालय को तीन पन्नों की लिखी थी चिट्ठी

नई दिल्ली:

चुनावों में पारदर्शिता लाने के मकसद से लाए गए इलेक्टोरल बॉन्ड योजना सवालों के घेरे में है। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि खुद चुनाव आयोग ने इस स्कीम पर एक साल पहले ही सवाल खड़े किए थे और इस संबंध में अपनी चिंता सरकार को जाहिर की थी। मगर, केंद्र सरकार ने आयोग द्वारा किसी भी तरह के सुझाव की बात से इनकार किया है। वित्त मंत्रालय ने संसद में एक सवाल के जवाब में बताया कि उसे इस संदर्भ में ऐसी कोई जानकारी आयोग की तरफ से नहीं मिली है।

टीएमसी सासंद नदिमुल हक ने पूछा कि अगर वाकई में चुनाव आयोग ने बॉन्ड के जरिए राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे पर सवाल उठाए थे, तो सरकार ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं? इस सवाल के लिखित जवाब में वित्त मंत्रालय की तरफ से बताया गया, सरकार को चुनाव आयोग द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड के संबंध में जाहिर चिंता के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।

एक अंग्रेजी अखबार के हवाले से दावा किया गया है कि 2017 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एके ज्योति ने इलेक्टोरल बॉन्ड के संबंध अपनी चिंता कानून मंत्रालय को जाहिर की थी। रिपोर्ट के मुताबिक इलेक्शन कमिशन ने मई,2017 में कानून मंत्रालय को तीन पन्नों की एक चिट्ठी लिखी थी। इस चिट्ठी में फाइनैंस एक्ट,2017 और रिप्रेजेंटेशन ऑफ पिपुल एक्ट 1951 में संशोधन के अलावा इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम पर गंभीर सवाल उठाए थे। आयोग ने नई स्कीम को राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में पारदर्शिता की कमी होने की बात कही थी।

यह चिट्ठी में कानून मंत्रालय को संबंधित स्कीम में बदलाव करने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था। ताकि, राजनीतिक दलों को मिलने वाले पैसे का सही ब्यौरा मिल सके। गौतलब है कि वित्त मंत्रालय ने जनवरी 2018 से अब तक 1,056.73 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड मिलने की पुष्टि की है। हालांकि, इसे शुरू करने के पीछे केंद्र सकार ने चुनावी चंदे में पारदर्शिता लाने का तर्क दिया था। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2 जनवरी, 2018 को बताया कि चुनावी बॉन्ड से राजनैतिक चंदे की प्रणाली में पारदर्शिता आएगा।

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