छत्तीसगढ़

राज्य सरकार और जिला प्रशासन से पैरोल की अवधि बढ़ाने की गुहार लगा रहे परिजन

ब्यूरो चीफ : विपुल मिश्रा

बिलासपुर-कोरोना काल में लगातार कोरोनावायरस संख्या और संक्रमितो की लंबी फेहरिस्त लगाकर बढ़ रही है। देश के कई राज्य ऐसे हैं जहां एक बार फिर कोरोना अपने आतंक मचाना शुरू कर दिया है वहीं छत्तीसगढ़ की बात करें तो यहां कि राजधानी में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

वहीं न्यायधानी में भी शासकीय कार्यालय के साथ ही हाई कोर्ट समेत जेल कर्मी भी संक्रमित पाए गए है। सेंट्रल जेल में क्षमता से अधिक कैदी होने के कारण यहा भी कोरोना संकट गहरा सकता है। आपको बता दें कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए माननीय उच्च न्यायालय कैदियों को पैरोल पर रिहा किया था, जिसकी अवधि अब खत्म होने वाली पर चिंता का विषय यह है कि फिर से एक बार सेंट्रल जेल में उसी तरह कैदियों को खचाखच भर दिया जाएगा पर अभी भी कोरोना का खतरा टला नहीं है जिसे देखते हुए कैदियों के परिजनों में डर और भय का माहौल है कहीं यह कोरोना किसी की जान ले ले, इसी तरह कटघोरा उप जेल में कोरोना की दस्तक के बाद सेंट्रल जेल से पैरोल पर छुटे सजायाफ्ता कैदियों और उनके परिजनों के मन मे डर समा गया है।

देश के अलग अलग राज्यों की सरकार ने कोरोना के मद्देनजर कैदियों की पैरोल की अवधि को बढ़ा दिया है मगर राज्य में इस ओर कोई निर्णय नही लेने और अगले महीने कैदियों को जेल में बुलाए जाने से अब मामला तूल पकड़ रहा है। इधर सेंट्रल जेल में क्षमता से अधिक कैदियों की तादात को जहन में रखते हुए उनके परिजन राज्य सरकार और जिला प्रशासन से कोरोना की जकड़ से बचने अपनो के लिए पैरोल की अवधि बढ़ाने की गुहार लगा रहे हैं।

बतादें देश के कुछ राज्यों में सरकार ने कोरोना के मद्देनजर पैरोल पर बाहर आए कैदियों को और छूट दे दी है। उड़ीसा,मध्यप्रदेश, पंजाब-हरियाणा समेत और भी राज्य में सजायाफ्ता कैदियों के पैरोल की तिथि में इजाफा कर दिया है वही छतीसगढ़ राज्य में इस ओर कोई कदम उठता न देख पैरोल की आजादी मिलने के बाद सजायाफ्ता कैदियों और उनके परिजनों के बीच भूपेश सरकार और जिला प्रशासन की अनदेखी की आग सुलग है। कैदियों के परिजनों का कहना है कि जेल एक सुधार घर है जहां कैदी अपने गुनाहों की सजा काटता है न कि महामारी के इस दौर में जेल के भीतर मरने को जाएगा। सेंट्रल जेल में वैसे भी क्षमता से अधिक कैदी है। कटघोरा उप जेल में एक साथ करीब 98 कैदियों के कोरोना की जद में आने के बाद सेंट्रल जेल के कैदी और उनके परिजनों को चिंता सताने लगी है। हालांकि पैरोल की अवधि बढ़ाने को लेकर सजायाफ्ता कैदियों के एक पक्ष ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है मगर उस मुद्दे में अब तक सुनवाई नहीं होने से मामला अधर में लटका हुआ है। प्रदेश की हाईपावर कमेटी के प्रस्ताव पर पिछले कुछ दिनों से कैदियों को पैरोल में छूट दिया गया था। इधर महामारी के बढ़ने से जान का खतरा भाप सजायाफ्ता कैदी जेल की चार दिवारियो में फिर से कैद होने के मूड में नही है।

सेंट्रल जेल में क्षमता से दो गुना कैदियों की भरमार है। कोरोना को लेकर बनाई गई गाइडलाइन का पालन जेल के भीतर होने की कोई उम्मीद कैदी और उनके परिजनों को नजर नही आ रही है। नाम नही छापने की शर्त पर कैदियों ने बताया कि जेल के भीतर की हालत बेहद चिंताजनक है। एक कैदी दूसरे कैदी से मुंह जोड़ के सोता है। ऐसे में क्या ख़ाक सोशल डिस्टेसिंग का पालन होगा।

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