छत्तीसगढ़

जैव विविधता संरक्षण में छत्तीसगढ़ के किसानों का अहम योगदान : डाॅ. प्रभु

रायपुर । इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केन्द्र रायपुर एवं पौध किस्म संरक्षण एवं कृषक अधिकार प्राधिकरण नई दिल्ली द्वारा आज यहां कृषि महाविद्यालय रायपुर के सभागार में पौध किस्म संरक्षण एवं कृषक अधिकार अधिनियम के तहत एक दिवसीय जागरूकता सह कृषक प्रषिक्षण आयोजित किया गया। पौध किस्म संरक्षण एवं कृषक अधिकार प्राधिकरण के अध्यक्ष डाॅ. के.व्ही. प्रभु ने कहा है कि देश में जैव विविधता संरक्षण में छत्तीसगढ़ के किसानों का अहम योगदान है।

यहां के किसानों ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी बहुत सी अमूल्य एवं दुर्लभ पौध प्रजातियों को बचाकर रखा जो आज देश के लिए अनमोल धरोहर साबित हो रही है। उन्होंने छत्तीसगढ़ में विभिन्न पौध प्रजातियों के संरक्षण के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सराहना की। डाॅ. प्रभु ने कहा कि प्राधिकरण द्वारा छत्तीसगढ़ के किसानों द्वारा संरक्षित पौध किस्मों का पंजीयन कर उन्हें इनके उपयोग का अधिकार देने की कार्यवाही की जा रही है। इस अवसर पर विभिन्न कृषि विज्ञान केन्द्रों एवं निजी किसानो द्वारा राज्य की जैव विविधता पर केन्द्रित प्रदर्शनी लगाई गई और जैव विविधता संरक्षण के लिए किसानों को सम्मानित भी किया गया। 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. एस.के. पाटील ने कहा कि पौध किस्म संरक्षण एवं कृषक अधिकार प्राधिकरण द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में किसानों द्वारा संरक्षित पौध किस्मों के उपयोग का अधिकार किसानों को दिया जा रहा है। प्राधिकरण से प्रमाणपत्र प्राप्त होने के बाद उन किसानों के बीज का उपयोग और कोई नहीं कर सकता।

उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से विभिन्न पौध किस्मों का संरक्षण करने वाले किसानों का चिन्हांकन कर उन्हें बीज पर अधिकार दिलाने में सहयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के द्वारा प्राधिकरण को लगभग तीन हजार पौध किस्में पंजीयन के लिए भेजी गई थी जिनमें से 1913 पौध किस्मों को पंजीकरण किया जा चुका है। लगभग पांच सौ किस्मों के पंजीयन प्रमाणपत्र किसानों को प्राप्त हो चुके हैं।

डाॅ. पाटील ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा वैद्यकीय उपयोग वाली जड़ी-बूटियों का पंजीयन भी संबंधित वैद्यों के नाम पर कराये जाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण द्वारा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय को छत्तीसगढ़ में औषधीय पौधों के गुणों के चिन्हांकन हेतु एक परियोजना स्वीकृत की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण के सहयोग से राज्य के सभी 27 जिलों में ऐसे कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जाएगें।

राज्य योजना आयोग के सदस्य डाॅ. डी.के. मारोठिया ने कहा कि छत्तीसगढ़ के किसानों द्वारा बिना किसी व्यावसायिक हित के पीढ़ियों से विभिन्न पौध किस्मों का संरक्षण कर एक बहुत ही सराहनीय कार्य किया गया है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि पौध किस्म संरक्षण एवं कृषक अधिकार प्राधिकरण के अध्यक्ष डाॅ. प्रभु का छत्तीसगढ़ प्रवास यहां की जैव विविधता के संरक्षण और किसानों को उनका अधिकार दिलाए जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। अतिथियों द्वारा ‘‘यूनिक वैरायटीज आॅफ छत्तीसगढ़’’ शीर्षक से प्रकाषित काॅफी टेबल बुक का विमोचन किया गया। उन्होंने राज्य के किसानों को बीज अधिकार प्रमाणपत्र भी वितरित किए।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के संचालक अनुसंधान डाॅ. एस.एस. राव ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर संचालक विस्तार सेवाएं डाॅ. ए.एल. राठौर, कृषि महाविद्यालय रायपुर के अधिष्ठाता डाॅ. ओ.पी. कश्यप सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, कृषि वैज्ञान केन्द्रों के समन्वयंक तथा बड़ी संख्या में कृषकगण उपस्थित थे। 

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